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असली जित सभी को साथ लेकर होती है | Hindi Kids Story | Panachtantra Ki Kahani

एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे | उनका जंगल बहुत खूबसूरत और हराभरा था | जिसकी वजह से वहा खाने पिने की कोही कमी नहीं थी | जंगल के सारे जानवर बहुत ख़ुशी से और मिलजुलकर रहते थे | पर जीतनी ख़ुशी उन सबको ज्यादा खाना होने की थी | उतना ही दुःख जंगल में पानी ना होने का था | उन्हें रोज सुबह शाम पानी पिने के लिए जंगल से दूर एक तालाब में जाना पड़ता था |

एक दिन पिंकू नाम का एक हिरन दूसरे जंगल से उस जंगल में रहने आता है | पिंकू जंगल में इधर-उधर घूम ही रहा होता है तब उसे एक पेड़ के निचे कछुवा बैठा दिखाई देता है | पिंकू उस कछुवे के पास जाता है और कहता है “सुनो दोस्त, तुम यहाँ अकेले क्यों बैठे हो” | पिंकू की बाते सुनकर कछुवा कहता है “मैंने तुम्हे इससे पहले इस जंगल में कभी नहीं देखा है, क्या तुम इस जंगल में नए हो” | तब पिंकू कछुवे को बताता है “हां दोस्त में इस जंगल में नया हु, मेरा नाम पिंकू है, क्या तुम मुझसे दोस्ती कर सकते हो” | कछुवा जवाब में कहता है “हां हां क्यों नहीं आज से तुम मेरे दोस्त हो, चलो में तुम्हे मेरे बाकी दोस्तों से मिलता हु” |

कछुवा पिंकू को अपने दोस्तों के पास लेकर जाता है, जहा पिंकू सुवर, खरगोश, बंदर और लोमड़ी से मिलता है | कछुवा पिंकू की सबसे पहचान करावा देता है | कुछ ही देर में वो सारे जानवर अच्छे दोस्त बन जाते है और एकसाथ बाते करने लगते है | वो सब लोग बाते ही कर रहे थे तब लोमड़ी कहती है सुनो दोस्तों मुझे जोर से भूक लग रही है तुम सब बाते करो में कुछ खाकर आती हु |

तब पिंकू भी कहता है भूक तो मुझे भी जोरो से लगी है, क्या में भी तुम्हारे साथ चल सकता हु” | तब बंदर भी कहता है “में भी साथ चलूँगा मुझे भी भूक लगी है” | वो तीनो जंगल में खाना ढूंढने के लिए निकल पड़ते है | कुछ दूर जाने के बाद पिंकू को एक आम का पेड़ नजर आता है | पिंकू बंदर और लोमड़ी से पूछता है “क्या हम आम खा सकते है, मुझे आम बहुत पसंद है” | पिंकू की बाते सुनकर बंदर पेड़ पर चढ़ जाता है और आम तोड़कर खुद भी खाता है और बाकि दोस्तों को भी खिलाता है |

इस तरह वो तीनो पेट भरकर आम खाते है | तब पिंकू कहता है “आम तो बहुत मीठे थे, लेकिन इतना ज्यादा खाने के बाद अब बहुत जोरो की प्यास लग रही है, चलो दोस्तों पास वाले नदी में जाकर पानी पिते है” | पिंकू की बाते सुनकर लोमड़ी और बंदर डर जाते है, उन दोनों को डरा देखकर पिंकू सोचने लगता है की ये दोनों डर क्यों रहे है | पिंकू कहता है “अरे दोस्तों, मैंने ऐसा क्या कह दिया की तुम दोनों डर गए” |

लोमड़ी कहती है “हम इसलिए डर रहे है क्योकि हम में से कोही इस जंगल के नदी पर पानी नहीं पि सकते है” | बंदर भी बिच में बोलता है और कहता है हां क्यों की उस नदी के पास एक ख़तरनाक गोरिला रहता है जो अपने आप को नदी का मालिक कहता है जब भी कोही जानवर नदी के पास पानी पिने के लिए जाता है | तब गोरिला उससे सवाल पूछता है अगर वह जानवर उस सवाल का जवाब नहीं दे पाता है या गलत जवाब दिया तो वो उस जानवर को नदी में फेक देता है |

इसलिए जंगल के सारे जानवरो ने वहा जाना बंद कर दिया | फिर लोमड़ी भी कहती है “वो गोरिला सवाल भी ऐसे पूछता है, जिसका जवाब आजतक कोही नहीं दे पाया, उसके सवाल जवाब के डर से, जंगल के बूढ़े जानवरो को पानी ना मिलने के कारन अपनी जान गवानी पड़ी | बंदर और लोमड़ी की बाते सुनकर पिंकू सोच में पड़ जाता है | कुछ देर सोचने के बाद “उसके दिमाग में एक योजना आती है, जिसके बाद वह लोमड़ी और बंदर को अपने साथ लेकर नदी पर चलने के लिए कहता है | पिंकू की बाते सुनकर बंदर और लोमड़ी नदी की तरफ जाने लगते है |

कुछ देर बाद वो तिनो नदी के पास पहुंचते है तब गोरिला उन्हें देखकर बहुत खुश होता है और कहता है “लगता है इस जंगल के जानवरो के अंदर मुझसे लड़ने की ताकत आ गयी है, तभी तो नदी की तरफ आ रहे है” | गोरिला ये सब कहता ही रहता है तब वो तीनो उअके पास पहुंच जाते है, वहा पहुंचने के बाद लोमड़ी और बंदर गोरिला के डर की वजह से दूर ही रुक जाते है | लेकिन पिंकू सब कुछ नजरअंदाज करके नदी की तरफ निकल पड़ता है |

यह देखकर गोरिला को बहुत गुस्सा आता है और वो गुस्से से पिंकू को कहता है “तुम्हारी इतनी हिम्मत की मेरे यहाँ होते हुए, मेरे इजाजत के बिना मेरे नदी से पानी पिने की कोशिश कर रहे हो, अगर तुम्हे यहाँ से पानी पीना है तो मेरे सवालो का जवाब देना होगा, सही जवाब दे दिया तो पानी की प्यास बुझा सकते हो, लेकिन अगर गलत जवाब दे दिया, तो में तुम्हे इसी नदी के अंदर फेक दूंगा” | यह कहकर गोरिला हसने लगता है |

गोरिला की बाते सुनकर पिंकू कहता है “मुझे मंजूर है लेकिन अगर मैंने सही जवाब दे दिया तो तुम्हे भी मेरी एक शर्त माननी होगी, जिसमे में तुम्हे एक पहेलि पूछूंगा, अगर तुम उसका जवाब नहीं दे पाए तो तुम्हे इस जंगल को हमेशा के लिए छोड़कर जाना होगा” | गोरिला हसते हुए कहता है “मुझे तो कुछ नहीं होगा पर लगता है, तुम अपने अहंकार में इन दोनों को भी साथ लेकर डूबोगे, तो सुनो तुम्हारा सवाल “मुझे बताओ की ऐसी क्या वस्तु है, जिसे हम अपने हातो के उपयोग के बिना, अपने हातो से रोक या पकड़ सकते है” | पिंकू गोरिला का सवाल ध्यान से सुनता है और जवाब है “हमारी सांस, हम हमारी सांस को हात से पकड़े बिना भी रोक सकते है, मैने तो जवाब दे दिया, अब तुम्हारी बारी है, शर्त के अनुसार तुम्हे जंगल छोड़ कर जाना होगा” | गोरिला चिंता में पड जाता है |

पिंकू गोरिला को सवाल पूछते हुए कहता है “ऐसा क्या है जो भगवान से ज्यादा बड़ा, और राक्षस से ज्यादा बुरा है, जो गरीब के पास है और अमीरो को उसकी जरुरत होती है, अगर तुम उसे खाना चाहोगे तो मर जावोगे, बताओ क्या है वो, आराम से इसका जवाब सोच लो, तबतक हम अपनी प्यास बुझा लेते है” | गोरिला सोच में पड़ा जाता है | पिंकू बंदर और लोमड़ी के साथ पानी पिने नदी के पास जाते है | अपनी पानी की प्यास बुझाकर पिंकू, बंदर और लोमड़ी फिर से गोरिला के पास आकर रुकते है |

कुछ देर तक सोचने के बाद भी गोरिला को पिंकू के सवाल का जवाब का कोही हल नहीं मिलता है तो वो अपनी हार मान लेता है | गोरिला पिंकू से कहता है |

में अपनी हार को स्वीकार करता हु, और शर्त के अनुसार हमेशा के लिए यह जंगल छोडकर जाने के लिए तैयार हु लेकिन जाने से पहले में तुम्हारे सवाल का ज़वाब जानना चाहूँगा क्या तुम मुझे उसका जवाब बता सकते हो | पिंकू गोरिला को कहता है “ठीक है में तुम्हे मेरे सवाल का जवाब जरूर बताऊंगा तो ध्यान से सुनो “इसका कोही जवाब नहीं है” |

पिंकू की बाते सुनकर सब जानवर हैरान हो जाते है | जिसके बाद पिंकू अपने पहेली का मतलब समझाता है और कहता है “दुनिया में भगवान से बड़ा और राक्षस से बुरा कोही नहीं होता, और गरीब के पास कुछ भी नहीं होता, और आमिर लोगो को कुछ नहीं चाहिए होता इस तरह अगर तुम कुछ नहीं खावोगे तो मर ही जावोगे | पिंकू का जवाब सुनकर अभी सोच में पड़ जाते है जिसके बाद गोरिला जंगल छोडके जाने लगता है |

गोरिला को जंगल छोड़ता हुवा जाता देखकर पिंकू उसे रोक लेता है, और उसे माफ़ करता हुवा, सभी के साथ हसते खेलते हुए रहने के लिए कहता है | जिसके बाद गोरिला जंगल छोड़ के नहीं जाता है और जंगल के सभी जानवर खुशी से साथ मिलकर रहने लगते है |

तो इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की हमेशा दुसरो को हराने में ही कभी किसी की जित नहीं होती | असली जित तो सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने में होती है |

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