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कर्मो का फल | हिंदी कहानियाँ | Hindi Stories

सोमपुर गांव में एक सुधाकर नाम का नारियाल पानी बेचने वाला रहता था | सुधाकर रोजाना पूजा करने के बाद अपने माता पिता का आशिर्वाद लेता था | सुधाकर के पड़ोस में ही बिरजु नाम का एक आइसक्रीम बेचने वाला रहता था | वह सुधाकर के नारियल पानी बेचने वाले काम पर हसता था | सुधाकर काम पर निकलने से पहले अपने माता पिता से आशिर्वाद लेता है | बिरजु और सुधाकर अपना अपना ठेला लेकर काम पर निकलते है |

एक दिन एक बूढ़ा भिकारी बिरजु के पास आता है और कहता है “बेटा कुछ खाने को दे दो” तब बिरजु उस बूढ़े भिकारी को कहता है “भागो यहाँ से, पता नहीं कहा कहा से चले आते है” |

बिरजु देखता है की सुधाकर के ठेले पर हमेशा ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है | फिर सुधाकर अपना ठेला लेकर नयी सड़क की और चला जाता है | नयी सड़क पर सुधाकर के पास और भी लोग नारियल पानी पीने आते है और सुधाकर उन सब को नारियल पानी पिलाता है | नयी सड़क पर सुधाकर की अच्छी बिक्री होती है |

बचे हुय नारियलों को लेकर सुधाकर पड़ोस के गांव में पहुँचता है | जहा उसके सभी नारियल बिक जाते है, उसके बाद सुधाकर खाना खाने के लिए एक पेड़ के पास बैठ जाता है | सुधाकर देखता है की रोड पर एक बूढ़ा भिकारी बैठा है | भिकारी लोगो से खाने के लिए कुछ मांग रहा है | यह देखकर सुधाकर भिकारी के पास जाता है और अपना खाना भिकारी को दे आता है | सुधाकर की दयाशीलता देखकर भिकारी चकित हो जाता है |

जब सुधाकर अपने घर के तरफ निकल रहा होता है तब रास्ते में सिद्ध योगी उसकी परीक्षा लेते है | सिद्ध योगी एक भिकारी का रूप लेकर सुधाकर के पास आते है और पिने के लिए पानी मांगते है | सुधाकर पानी मांगते ही अपना पानी उस सिद्ध योगी रूप में आये भिकारी को दे देता है | सुधाकर भिकारी को पानी पिलाकर अपने घर के और निकालता है | रास्ते में वो देखता है की एक बूढ़ा आदमी ठंड से काँप रहा है | तब सुधाकर अपना गमछा उस बूढ़े आदमी को देने की सोचता है | सुधाकर ठंड से काँप रहे उस आदमी को अपना गमछा उसे देता है |

शाम को सुधाकर अपने घर को पहुंचता है और अपनी पत्नी को सब्जिया लाकर देता है | फिर वह अपने माता पिता के पास बैठकर उन्हें अपना हाल सुनाता है | सुधाकर का खुशहाल परिवार देखकर बिरजु को बहुत जलन होती है और मन ही मन कहता है, ये सुधाकर नारियल पानी बेचता है फिर भी उसकी अच्छी कमाई हो जाती है इसका जरूर कुछ करना पड़ेगा, आज रात में उसके नारियल और ठेला दोनों को चुरा लूंगा, फिर देखता हु इसका परिवार कैसे खुश रह पायेगा |

रात में बिरजु चोरी छुपे  सुधाकर के घर जाता है | वह सभी नारियलों को ठेले पर रखता है और ठेले को चुराकर अपने घर ले जाता है | सुबह जब सुधाकर घर के बाहर आता है, तब देखता है की ठेला और नारियल दोनों गायब है, यह देखरकर सुधाकर बहुत दुखी होता है | वह सोचता है अब में अपना परिवार कैसे चलाऊंगा, नारियल पानी ही तो मेरे रोजी रोटी का एकमात्र साधन था | सुधाकर की पत्नी उससे पूछती है “आप इतने दुखी क्यों है” तब सुधाकर अपने पत्नी से कहता है नारियल और ठेला दोनों चोरी हो गए, मुझे समझ नहीं आ रहा अब में क्या करू” |

सुधाकर मदत मांगने सिद्ध बाबा के पास जाता है | यह सब देखकर बिरजु हसता है, लेकिन बिरजु की नजर आइसक्रीम ठेले पर पड़ती है, तो वह चौक जाता है | बिरजु का आइसक्रीम ठेला एक खिलौना बन जाता है | सुधाकर सिद्ध बाबा के पास पहुँचता है और बाबा को प्रणाम करता है | सुधाकर की हालत देखकर बाबा उससे कहते है “सुधाकर तुम इतने दुखी क्यों लग रहे हो” | बाबा के पूछने पर सुधाकर बताता है “मेरे नारियल और ठेला दोनों चोरी हो गए दोनों घर के बाहर ही रखे थे | अब मुझे समझ नहीं नहीं आ रहा है की में अपने परिवार को कैसे चलाऊ” |

तब सिद्ध बाबा ने कहा “तुम घर जाओ ईश्वर कोही ना कोही रास्ता जरूर दिखायेगा” | सुधाकर जब अपने घर की तरफ निकल रहा होता है तो सिद्ध बाबा एक नारियल का पेड़ बेचने वाले का रूप धारण करके सड़क पर बैठ जाते है | सुधाकर को देखकर वह कहते है “सुनिए भाई नारियल का पेड़ ख़रीदिये यह पौधा एक ही रात में बड़ा हो जाता है” |

सुधाकर कुछ सोचता है और फिर कहता है “लेकिन मेरे पास तुम्हे देने के लिए कुछ भी नहीं है | तब वह नारियल पेड़ बेचने वाला कहता है “कोही बात नहीं तुम मुफ़्त में एक पौधा ले सकते हो”, मैंने देखा है की तुम एक अच्छे आदमी हो | सुधाकर पौधेवाले से एक पौधा ले लेता है और उसे अपने घर ले जाता है फिर सिद्ध बाबा वहा से गायब हो जाता है | सुधाकर घर आकर उस नारियल के पेड़ को अपने आँगन में लगा देता है |

जब सुधाकर सुबह अपने घर के बाहर आता है तो देखता है की नारियल का पेड़ बड़ा होकर उसपर ढेर सारे नारियल लगे है यह देखकर सुधाकर बहुत खुश होता है | सुधाकर और उसकी पत्नी पेड़ के आगे हात जोड़ते है | सुधाकर पेड़ से नारियल तोड़ लेता है | पेड़ पर तुरंत और नारियल आ जाते है |  सुधाकर फिर से नयी सड़क पर टेबल रखकर नारियल पानी बेचना शुरू करता है |

उसकी कमाई फिर से शुरू हो जाती है | सुधाकर के पास ग्राहकों को भीड़ लगने लगती है, तब सुधाकर सोचता है क्यों न में सिद्ध बाबा और उस नारियल पेड़ बेचने वाले को धन्यवाद बोलाना चाहिए | शाम को सुधाकर सिद्ध बाबा को ढूंढने जाता है और देखता है की सिद्ध बाबा वहा से गायब है | फिर वह उस पौधे वाले को ढूंढने जाता है पर वहा उसे कोही नहीं मिलता है | सुधाकर सब्जी लेकर अपने घर लौट जाता है |

कुछ दिनों बाद सुधाकर आमिर हो जाता है | वह बड़ा घर बनवा लेता है और एक गाड़ी भी खरीद लेता है | सुधाकर एक वृद्धाश्रम बनवाता है जहा वो और उसकी पत्नी गरीब लोगो को खाना और कपड़ा बाटते है और उनकी सेवा करते है |

तो हमें क्या सिख मिलती है अगर आप दुसरो के साथ अच्छा करोगे तो तुम्हारे साथ भी अच्छा ही होगा और अगर तुम किसी के साथ बुरा करोगे तो तुम्हारे साथ भी बुरा ही होगा, तो हमेशा दुसरो के बारे में भला और अच्छा सोचना सोचना चाहिए|

कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद |

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