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घमंडी पेड़ की कहानी | Ghamandi Aam Ke Ped Ki Kahani

सीतापुर नाम के गांव में सुधाकर नाम का एक किसान रहता था | उसने अपने घर के आँगन में एक आम का पेड़ लगाया था | उस पेड़ को वह किसान रोजाना पानी डालता था, और उसके आस पास बहुत अच्छी तरह से साफ सफाई भी किया करता था | उस आम के पेड़ के पास ही में एक निम् का भी पेड़ था | हर दिन वह किसान सिर्फ आम के पेड़ को ही पानी डालता था और उसी पेड़ का ख्याल रखता था | निम् के पेड़ की बिलकुल देखभाल नहीं करता था |

यह देखकर आम के पेड़ को लगाने लगा की वह बहुत खास है | यह सोचकर वह आम का पेड़ अपने आप पर गर्व महसूस करने लगा | जैसे जैसे वक्त बढ़ता गया वह दोनों पेड़ भी बड़े हो गए | आम का पेड़ बहुत खूबसूरत लगने लगा और उसके सुंदर फूल भी निकलने लगे फिर वह फल देने लगा | उस पेड़ के आम बहुत ही मीठे और स्वादिष्ट थे | लेकिन निम् के पेड़ के फल उतने ही कड़वे थे | निम् के फल खाने के बिलकुल काम नहीं आते थे | इसलिए आम के पेड़ को आपने आप पर बहुत गर्व और घमंड आ गया |

एक दिन निम् के पेड़ ने आम के पेड़ से कहा “सुनिए आम के पेड़ आजकल आपने बात ही करना बंद कर दिया है, जब हम दोनों छोटे थे तब हम कितनी बाते एक दूसरे से किया करते थे” | तब आम के पेड़ ने कहा “क्या बताऊ में तुम जैसा बेकार पेड़ नहीं हु, मेरे पास मीठे मीठे फल है जिन्हे खाने के लिए बहुत सारे लोग आते रहते है, इसलिए मेरे पास तुमसे बात करने के लिए समय नहीं है’ | फिर निम् के पेड़ ने कहा “अगर तुम्हे मुझसे बाते करना अच्छा नहीं लगता तो ठीक है में तुमसे बात नहीं करूँगा |

तब आम के पेड़ ने कहा “तुमने सही कहा है, में एक बहुत ही खास पेड़ हु, स्वादिष्ट फल देता हु, सब लोग मुझसे बहुत प्यार भी करते है, पर तुम्हारे पास क्या है, तुम जैसे पेड़ से बात करके में अपना वक्त बिलकुल बर्बाद नहीं करूँगा” | आम के पेड़ की इस बात पर निम् के पेड़ ने जवाब में कहा “अपने आप पर इतना गर्व मत करो, में कड़वा जरूर हु पर मेरे फलो से बहुत सारा औषधि बनती है और इतना ही नहीं “मेरे पेड़ के हर एक हिस्से में बहुत अच्छे औषधि गुण है, जिनसे लोगो को बहुत फायदा होता है | इसीलिए मै तुमसे बेहतर हु” | तब आम के पेड़ ने कहा ऐसा कुछ भी नहीं है मैंने जो भी कहा वही सच है और वैसे भी यह बात सब जानते है, अब आप ही बताइये हम में से कौन बेहतर है” |

इस तरह हर दिन निम् और आम के पेड़ का झगड़ा होता था | रोज उन दोनों का झगड़ा बढ़ता गया | दोनों अपनी अपनी तारीफ करने लगे की “में ज्यादा खास हु, में ज्यादा खास हु” | इन दोनों पेड़ो के बिच में एक नारियल का भी पेड़ था जो हर दिन इन दोनों का झगड़ा सुनकर अपने कान बंद कर लिया करता था | एक दिन आम और निम् के पेड़ का झगड़ा कुछ ज्यादा ही होने लगा | फिर नारियल के पेड़ से बर्दाश नहीं हुवा और वो कहने लगा “बंद करो तुम्हारा झगड़ा, तब निम् के पेड़ ने कहा माफ़ कीजिये नारियल के पेड़, आप को शायद हमारे झगड़े से परेशानी हुई होगी, पर देखिये ये आम का पेड़ हमेशा मुझे निचे दिखाने की कोशिश करता है” | तब आम के पेड़ ने कहा “ऐसा कुछ भी नहीं है, मैंने वही कहा जो सच है, वैसे भी ये बात सब लोग जानते है अब आप ही बताइये हम में से कौन बेहतर है ” |

दोनों की बाते सुनकर नारियल के पेड़ ने आम के पेड़ से कहा “अगर तुम बुरा न मानोगे तो में तुम्हे एक बात बताऊंगा “तुम मीठे फल जरूर देते हो इसलिए सब लोग तुम से बहुत प्यार करते है | निम् के फल बहुत कड़वे होते है लेकिन उससे बहुत अच्छे औषध बनते है, और वे लोगो के बहुत काम भी आते है इसलिए मुझे ये लगता है की निम् का पेड़ तुमसे बेहतर है |

लेकिन आम का पेड़ किसी की सुनने के लिए तैयार नहीं था | उसने नारियल के पेड़ से कहा “ऐसा कुछ नहीं है सिर्फ तुम्हारा फैसला कर लेने से कुछ नहीं होगा, मेरे फलो का कोही जवाब नहीं और यह बात सबको माननी ही होगी” |

आम के पेड़ की घमंड भरी बाते सुनकर किसी ने कुछ नहीं कहा और चुपचाप हो गए | कुछ दिन गुजरने के बाद आम के पेड़ के सारे फल और फूल गिरने लगे और उसके जड़ो में कीड़ा लग गया | जिसकी वजह से आम का पेड़ बहुत ही कमजोर हो गया | उसके पेड़ के सारे पत्ते तूट कर गिरने लगे वह बहुत की ज्यादा कमजोर हो गया | यह देखकर किसान ने निम् के बीजो को लेकर उनका काढ़ा बनाकर हर दिन आम की पेड़ के जड़ो में डाला करता था | उसी तरह कुछ दिन ऐसा ही करने के बाद आम के पेड़ का कीड़ा ख़तम हो गया और किड की समस्या दूर हो गयी |

आम का पेड़ पहले की तरह खूबसूरत बन गया | फिर से फूल और फल देने लग गया | आम के पेड़ को अपने गलती का एहसास हो गया | उसने ये जान लिया की अपने खूबियों को लेकर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए | आम के पेड़ को निम् के पेड़ के खूबियों का पता चला फिर आम के पेड़ ने निम् के पेड़ से माफ़ी भी मांगी |

किसी भी विषय में ये समझना अच्छी बात नहीं है की मैं ही सबसे बेहतर हु | हर किसी में कोही न कोही अच्छा गुण पाया जाता है | इसलिए हमारे अंदर की एक अच्छाई को लेकर किसी को निचा नहीं दिखाना चाहिए क्योकि हर किसी में कोही न कोही अच्छाई जरूर होती है |

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