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जादुई गुड़िया की कहानी | Hindi Kahaniya | Kids Kahaniaya

एक गांव में गोपाल नाम का लड़का रहता था |  उसके माता पिता बहुत ही गरीब थे | दोनों मिलकर खेतो में काम करते थे और परिवार का पोषण करते थे | गोपाल का कोही भी दोस्त नहीं था | गरीब होने के कारन उसके पास कोही भी खिलौने नहीं थे | उसके घर के सामने एक पेड़ था | हमेशा वह उस पेड़ के ऊपर बैठ जाता था और आने वाले लोगो को देखा करता था | कभी वह आसमान को देखता था जहा तरह तरह के पंछी उड़ा करते थे | तो कभी-कभी निचे वह लोगो की चहल पहल देखता था | इसमें ही उसका पूरा दिन निकल जाता था |

वह हमेशा अपने माँ बाप से खिलौने की मांग करता था | गोपाल के माँ बाप के पास इतने  पैसे नहीं हुवा करते थे की वो एक गुड़िया खरीद कर दे सके | गरीबी के कारन वह गोपाल को एक खिलौना तक नहीं खरीद कर दे सके | एक दिन की बात है एक खिलौना बेचने वाला गोपाल के घर के सामने से गुजर रहा था | उसे देखकर गोपाल ने अपने माँ से कहा “माँ  मेरे लिए एक गुड़िया खरीद कर दो, मुझे भी खेलना है, तब उसकी माँ उससे कहती है “बेटा हमारे पास इतने पैसे नहीं है फिर भी में कोशिश करती हु” | गोपाल कहता है “आज मुझे किसी भी तरह से खिलौना खरीद कर दो, आप लोग मुझे खिलौने खरीदकर नहीं देते हो |

गोपाल के जिद के कारन उसकी माँ सोचती है | एक छोटी सी गुड़िया खरीदने में क्या जाता है | फिर वह यह सोचकर खिलोने वाले के पास जाती है , और कहती है सुनो भाई, “ये गुड़िया कितने की है, तब खिलोने बेचने वाला आदमी कहता है दस रुपए की है बहन जी”| गुड़िया की कीमत ज्यादा होने के कारन वह उसे नहीं खरीदती है | गोपाल उदास होकर रोते हुए घर वापस जाता है और उस रात बिना खाना खाये सो जाता है | फिर दूसरे दिन पेड़ पर वापस जाकर बैठ जाता है, जिसपर वो हमेशा बैठा करता था |

रोज की तरह वो इधर-उधर देखने लगता है | अचानक एक पंछी आते हुए उसे दिखाई देता है, वो बड़ा ही अलग पंछी था |  उसके बड़े-बड़े पंख थे|  चोंच भी बड़ी  थी | पर उसने अपनी चोंच में कुछ पकड़ रखा था |  वो उड़ता हुआ आकर पेड़ पर बैठा जहा पर गोपाल बैठा हुवा था | गोपाल ने उसकी तरफ देखा तो उसकी चोंच में कुछ नजर आता है, गौर से देखने के बाद उसकी चोंच में एक गुड़िया नजर आती है | और वो पंछी उस गुड़िया को उसी डाल पर छोड़के चला जाता है |

गोपाल उस गुड़िया को उठा लेता है | उसे देखकर गोपाल कहता है “अरे ये तो बहुत खूबसूरत गुड़िया है | ये तो अपनी आँखे भी खोलती और बंद करती है | गोपाल उस गुड़िया को पाकर बहुत खुश हो जाता है | गुड़िया को लेकर घर के अंदर आता है, मोहिनी दिन उसी गुड़िया के साथ खेलता है | और रात को भी उसी से खेलता हुआ अपने पास रखकर सो जाता है |  जैसे ही रात के १२ बजते है, तो अचानक उस गुड़िया के अंदर जान आ जाती है | और अपने पंख लहराकर उड़ने लगती है |

रात के अंधेरे में वह बहुत चमक रही होती है | उसके रोशनी से मोहिनी घर और कमरा चमक रहा था | कुछ देर बाद रोशनी की वजह से गोपाल की आँख खुल जाती है | वो देखता है की गुड़िया तो और सुंदर लग रही है, उसके तो पंख भी है, गोपाल को तो याकिन ही नहीं हो रहा था | तब गुड़िया गोपाल से कहती है “गोपाल तुम मुझे बहुत अच्छे लगे, तुम्हारी तरह मेरा भी कोही दोस्त नहीं है, अबतक में उन्ही पक्षियों के साथ रहती हु” |

तब गोपाल कहता है “क्या तुम्हारे कोही माता-पिता नहीं है” | गुड़िया कहती है “मेरी माँ एक देवकन्या थी, और वो सारे पक्षियों के संरक्षक थी, सबकी रक्षा करती थी | जब में छोटी थी तब एक जादूगरनी ने मुझे अपने जादू से गुड़िया बना दिया और मुझे अपनी माँ से दूर कर दिया” सिर्फ रात के कुछ समय के लिए, मेरे अंदर जान आती है” |

गुड़िया की बाते सुनकर गोपाल कहता है “तुम्हारी बाते सुनकर मुझे बहुत बुरा लग रहा है, क्या तुम्हे अपने परिवार से मिलने का मन नहीं करता है” | गुडिया कहती है “मैंने बहुत कोशिश की पर में ज्यादा दूर नहीं उस सकती क्योकि उसी जादूगरनी ने मेरे पंख पर कोही दवा लगा दी है” | गोपाल कहता है “क्या में तुम्हारी कोही मदत कर सकता हु | वह बाते ही कर रही थी अचानक छोटी सी गुड़िया बन जाती है | गोपाल गुड़िया को हात में लेकर उसके बारे में सोचने लगता है | गोपाल उस गुड़िया की मदत करना चाहता था और रात होने का इंतजार करने लगा |

जैसे ही रात के १२ बजते है उस गुड़िया के अंदर जान आ जाती है | गोपाल गुड़िया से उसका नाम पूछता है, और कहता है “में पुरे दिन तुम्हारे बारे में सोचता रहा की में तुम्हारी मदत कैसे करू” | गुड़िया कहती है “मेरा नाम मोहिनी है, और सारे पंछी मुझे इसी नाम से बुलाते है, मेरे माँ के बाद में ही उनकी रक्षक हु, पर में ही इस तरह से बंदी बनकर रह गयी, वो जादूगरनी बहुत ही खतरनाक है सारे पंछियो को अपना नौकर बनाना चाहती है” | तब गोपाल कहता है “तुम चिंता मत करो में तुम्हारी मदत करूँगा, उस दुष्ट जादूगरनी से में तुम्हे छुड़ाऊंगा” |

तब गुड़िया कहती है “मझे याद है गोपाल कही साल पहले वो जादूगरनी इसी घर में रहती थी, और पंछियो के राजा ने उसका अंत करने के लिए बहुत कोशिश की थी, और वो भी वही बैठा करते थे, जहा तुम उस पेड़ पर बैठा करते हो, मैंने बहुत बार तुम्हे उसी जगह पर बैठा देखा है, इसलिए में तुम्हारे पास आयी हु” | तब गोपाल कहता “में भी आसमान में पंछियो को देखा करता था और उनकी तरह उड़ना भी चाहता था” | गुड़िया कहती है “गोपाल मेरी बात ध्यान से सुनो, पंछी  के राजा ने उस जादूगरनी को कैद करने के लिए एक पिंजरा बनाया है, उस पेड़ के अंदर एक जादुई माया दंड है, जिससे जादूगरनी का अंत हो सकता है, हमें उस मायादंड को निकलने की बहुत कोशिश की लेकिन उस जादूगरनी के शाप के कारण हम में से कोही भी उसके अंदर प्रवेश नहीं कर पाया, लेकिन ये काम एक इंसान कर सकता है |

मोहिनी से सारी बाते बता ही रही थी तब वह एक गुड़िया के रूप में बदल जाती है | दूसरे दिन सुबह होते ही, गोपाल पेड़ की गुफा को खोजने लगता है | अचानक वो गुफा उसे दिखती है | गोपाल बहुत ही सावधानी के साथ उस गुफा के अंदर हात डालता है | और उस माया दंड को निकाल लेता है | घर आता है और उस मायदंड को मोहिनी के सरपर रखता है | देखते ही देखते मोहिनी के अंदर जान आ जाती है, मोहिनी जादू की कैद से आजाद हो जाती है | मोहिनी गोपाल को धन्यवाद कहती है और बोलती है “क्या में अपने माँ से मिलने जा सकती हु” | तब गोपाल कहता है हां हां, तुम जा सकती हो जल्दी जाओ और मुझसे मिलाने आती रहना” | मोहिनी गोपाल को अलविदा कहकर चली जाती है |

गोपाल फिर पहले की तरह अकेला और उदास हो जाता है | लेकिन वह मन ही मन बहुत खुश था की उसने मोहिनी की मदत की थी |

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