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जादुई चक्की की कहानी – Hindi Stories

रामपुर गांव में दो भाई रहा करते थे | सुधाकर और गोपाल, बड़ा भाई सुधाकर बहुत अमीर था | छोटा भाई गोपाल मेहनत तो खुप करता था | लेकिन वह अपने और अपने परिवार की जरुरते पूरी नहीं कर पाता था | अपने गरीबी से वह बहुत परेशान था | सुधाकर ने पिताजी की कमाई से गोपाल को उसका हिस्सा सुधाकर ने नहीं दिया था, और वह गोपाल की कोही मदत करता था |

दिवाली का त्यौहार था | सब जगह दियो की रोशनी थी | घर-घर में मीठा नमकीन नए कपडे और खुशियों का माहौल था | सुधाकर के घर पर बहुत धूम-धाम से दिवाली मनाई जा रही थी | वही गोपाल के घर पर त्यौहार तो क्या, खाने पिने के लिए भी पैसे नहीं थे | वह मदत की अपेक्षा से अपने बड़े भाई के घर पंहुचा और कहता है “सुनो भैया मेरे काम का अब कोही ठिकाना नहीं है, में परेशांन हो चूका हु, मै हर रोज काम के तलाश में बाहर निकलता हु, लेकिन मुझे काम नहीं मिलता है, घर पर मेरे पत्नी और बेटा भूका बैठा है, मेरी कुछ मदत करो, मेरे पास पैसे आते ही, में तुम्हारा कर्ज लौटा दूंगा | तब सुधाकर कहता है “गोपाल मैंने बहुत मेहनत से यह ऐशोआराम कमाया है, आजकल खर्चे भी बहुत बढ़ गए है, तुम्हे भी कड़ी मेहनत करनी होगी, मै तुम्हारी कोही मदत नहीं कर सकता, अब तुम यहाँ से जा सकते हो” |

तब गोपाल कहता है “पिताजी ने मेरा जो हिस्सा दिया है, वही मुझे लौटा दो, मैंने आजतक तुमसे कभी कुछ नहीं माँगा, लेकिन आज मेरे बुरे दिन चल रहे है इसलिए में अपना हिस्सा मांग रहा हु | तब सुधाकर गुस्से से कहता है तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुम मुझसे हिस्सा मांग रहे हो, अभी यहाँ से दफा हो जाओ, वरना मुझसे बुरा कोही नहीं होगा | 

गोपाल को अपने भाई के बरताव से बहुत बुरा लगा, वह काम की खोज में जंगल की तरफ निकल पड़ा, कुछ दूर चलते ही, उसे वहा एक बूढी औरत दिखाई दी, उसके सामने लकड़ियों का ढेर था | गोपाल ने सोचा ‘अगर में इनकी मदत करूँगा तो मुझे कुछ पैसे मिल सकते है’ | गोपाल उस बुढ़िया के पास जाता है और कहता है में आपकी कोही सहायता कर सकता हु, में ये लकडिया आपके घर पंहुचा दूंगा पर क्या आप मुझे उसके बदले कुछ पैसे दे सकते हो, अगर कोही दूसरा भी काम होगा तो में कर दुगा |

गोपाल की बाते सुनकर उस बुढ़िया ने कहा “ठीक है में तुम्हे पैसे दूंगी, लेकिन तुम इतने दुखी क्यों लग रहे हो” | तब गोपाल उस बुढ़िया को सारी बाते बता देता है | गोपाल की बाते सुनकर वो बुढ़िया कहती है, “तुम चिंता मत करो, में तुम्हे कुछ मिठाई दे रही हु, और में जैसा कहती हु वैसा तुम करो तुम्हारी सारी चिंता दूर हो जायेगी |

अब ध्यान से सुनो “कुछ आगे जाते ही, तुम्हे चार घने पेड़ दिखेंगे, उनके पीछे ही छोटी सी एक गुफा है, उसमे तीन बौने रहते है और उन्हें ये मिठाई बहुत पसंद है, जैसे ही वह ये मिठाई देखेंगे वो तुमसे ये मिठाई मांगेगे, तुम इस मिठाई के बदले उनसे चक्की मांग लेना, चक्की के आते ही तुम्हारे दिन बदल जाएंगे” |

गोपाल ने बूढी औरत की मदत की, और उनसे वो मिठाई लेकर जंगल की तरफ निकल पड़ा | कुछ देर चलने के बाद उसे चार बड़े पेड़ दिखाई दिए | उनके पास जाते ही गोपाल को एक गुफा दिखाई दी | उसका दरवाजा बहुत ही छोटा सा था | वह झुककर गुफा के अंदर गया | जैसे ही वह अंदर गया उसने देखा तीन बौने अंदर खड़े थे | गोपाल के हात में मिठाई देखकर वह तीनो ही बहुत खुश हुवे |

उनमे से एक कहता है “हमें ये मिठाई बहुत पसंद है, क्या तुम हमें ये दे सकते हो” | गोपाल कहता है “हा में ये तुम्हे देने के लिए तैयार हु, लेकिन मुझे इसके बदले वो चक्की दे दो | तब बौने कहते है “ठीक है हम तुम्हे ये चक्की दे देंगे, लेकिन सुनो ये कोही मामूली चक्की नहीं है, ये जादुई चक्की है, तुम इससे जो भी मांगोगे वो तुम्हे मिल जायेगा, और जैसे ही तुम्हारी जरुरत पूरी हो जाये, तुम इसपर लाल कपड़ा डाल देना, इस चक्की को रोकने का यही एक तरीका है” |

बौनों की बाते सुनकर गोपाल कहता है “ठीक है में इस बात को हमेशा याद रखूँगा” | गोपाल बहुत ही खुश हो गया, लेकिन उसे यकींन नहीं हो रहा था की उसने वो मिठाई उन बौनों को दे दी, और चक्की लेकर घर आ गया | घर पर उसकी पत्नी और बेटा भूके ही उसकी राह देख रहे थे |

गोपाल ने पत्नी को सारी घटना बताई, उन्होंने चादर बिछाकर उसपर चक्की रख दी | गोपाल ने चक्की से कहा “चक्की चक्की चावल दे दो | देखते ही देखते वहा चावल का ढेर लग गया | फिर गोपाल ने लाल कपड़ा डालकर चक्की को रोक दिया | उसने चक्की से दाल, गेहू और बाकि का अन्य सामान भी मांग लिया | गोपाल और उसके परिवार ने भरपेट खाना खाया |

अब गोपाल बाकि का अनाज लेकर बाजार जाकर बेच आता था | देखते ही देखते गोपाल की आर्थिक परिस्थिति सुधरने लगी थी | पहनने के लिए अच्छे कपडे, भरपेट खाना और बच्चे की शिक्षा सबकुछ आसान हो गया | गोपाल ने नया घर भी बनवाया, यह बात उसके बड़े भाई सुधाकर तक पहुंच गयी | यह जानकर उसे बहुत हैरानी हुई और कहने लगा “कल तक तो इस गोपाल के पास खाने के लिए पैसे नहीं थे, अब इसके पास इतना सारा धन कहा से आया, मुहे ये जानना ही चहिए” |

वह खाना खाने के बहाने गोपाल के घर गया | खाना खाकर बाहर न जाते हुए वो खिड़की के पास रुक गया | जैसे ही गोपाल ने चक्की से आनाज माँगा चक्की ने आनाज देना शुरू कर दिया | यह देखकर सुधाकर ने सोचा की वह इस चक्की को चुराकर घर ले जायेगा | दूसरे दिन गोपाल अनाज बेचने जब बाजार गया तो सुधाकर चुपके से गोपाल के घर में घुस गया और चक्की को चुराकर अपने घर लेकर गया |

घर आकर उसने अपने पत्नी से कहा “जल्दी से अपना सामान बांध लो क्यों की हम लोग अभी इस गांव छोड़कर जा रहे है | सुधाकर की पत्नी उससे सवाल पूछने लगती है | सुधाकर उससे कहता है “सवाल मत करो, तुम्हारे सारे सवालो के जवाब में बाद में दूंगा पहले हमें यहाँ से निकालता है” | सुधाकर पत्नी और बच्चो के साथ अपना घर और गांव छोड़कर निकल पड़ा | दूर कही जाकर दूसरे गांव में जाकर बसने का सपना वह देखने लगा | उसने एक नाँव खरीदी और अपने पत्नी और बच्चे के साथ वह नाव में बैठ गया |

उसकी पत्नी उससे कहती है “इतनी भरी चक्की लेकर और गांव छोड़कर हम क्या करेंगे” | सुधाकर अपने पत्नी से कहता है “यह कोही मामूली चक्की नहीं है, यह एक जादुई चक्की है, इसकी वजह से गोपाल इतने बड़े घर और धन दौलत का मालिक बना है, में इस चक्की को उसके घर से उठाकर ले आया हु, इससे हम बहुत धन कमा सकते है, और आराम की जिंदगी गुजारेंगे, रुको में तुम्हे अभी दिखता हु की यह चक्की कैसे काम करती है | सुधाकर चक्की को कहता है “चक्की चक्की नमक निकाल” |

चक्की ने नमक निकलना चालू कर दिया देखते ही देखते नाँव में नमक भरने लग गया | सुधाकर को चक्की कैसे रुकती है ये तो पता ही नहीं था | नमक के वजन से नाव पानी में डूबने लगी | सुधाकर और उसका परिवार पानी में गोते खाने लगे | सुधाकर के लालच के वजह से उसे और उसके परिवार को अपनी जान गावनि पड़ी | गोपाल मेहनती था | चक्की उसके पास नहीं थी, लेकिन आजतक चक्की ने जो भी दिया था | गोपाल ने अपनी मेहनत से उसे दुगना कर दिया था |

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