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जादुई नदी की कहानी: Hindi Kahaniya | Moral Stories

रमेश और अमरेश दोनों सगे भाई थे | लेकिन दोनों एक दूसरे से बिलकुल अलग थे | रमेश बहुत चलाख था और अमरेश बहुत ही सीधा साधा और भोला था | वह दिखाने में काला था इसकी वजह से रमेश हमेशा उसका मजाक उड़ाया करता था | बड़ा होने पर जब दोनों की शादी हो गयी तब रमेश को ऐसी पत्नी मिली जो रमेश का घमंड दुगना कर गयी |

उसकी पत्नी उससे भी ज्यादा चालाख थी | उसने रमेश के कान भर-भर कर अमरेश के हिस्से की भी जायदाद हड़प ली | रमेश ने अपने लिए एक बड़ा घर बनवा लिया और अमरेश को रहने के लिए एक छोटा सा झोपड़ा दे दिया | भोला भाला अमरेश उस छोटे से झोपड़े में ही खुश रहने की कोशिश करने लगा | पर उसकी पत्नी उसे खुश नहीं रहने देती उसे ताना मार-मार कर अंदर ही अंदर तोड़ते रहती |

एक दिन परेशांन होकर वह जंगल में दूर बहुत दूर चला गया | रात जंगल में ही बिताने के बाद जब सुबह उठा तो सामने बहते हुए जादुई नदी में जाकर मुँह धोते हुए मन ही मन कहा “काश में भी अपने भाई की तरह गोरा होता” उस नदी के पानी से वह गोरा हो गया | जब वह घर लौटने लगा तो सारे लोग उसकी तरफ देख रहे थे | अमरेश को पता ही नहीं था की उस जादुई नदी के पानी से उसका रंग गोरा हो गया है |

जब वह घर लौटा तो उसके पत्नी ने कहा “अरे आपके चहरे को क्या हुवा “, तब रमेश बोला क्या हुवा, रातभर सोया नहीं इसलिए कुछ हुवा होगा” | तब उसके पत्नी ने कहा “आप अपने भाई से भी ज्यादा गोर हो गए है” | तब उसने आइने में चेहरा देखा और कहा “यह कैसे हो गया, में इतना गोरा कैसे हो गया” | दिनभर वह सोचता रहा की ऐसा चमत्कार कैसे हो गया | बार-बार उसे जादुई नदी की याद आ रही थी और उसे याद आया की मुँह धोते समय उसने गोरा होने की बात की थी, कही नदी के पानी में कोही जादू तो नहीं है |

यही सोचकर वह शाम होते ही फिर जंगल में जादुई नदी के किनारे पहुंच गया और अपने हात नदी के पानी में डुबोता हुवा बोला “आप ने मुझे गोरा बना दिया, अब भाई की तरह थोड़ा धन भी देदो” | तब नदी में से कुछ तहरता हुवा धन उसके पास आता है | जब वह ये बात अपने पत्नी सुमित्रा को बताता है तो सुमित्रा को भी यकींन नहीं होता है | पर उसके हात में सोने की अशर्फिया देखकर उसे यकींन करना पड़ता है |

फिर भी वह अमरेश से कहती है “की मेरे शादी में मेरी माँ ने एक अंगूठी दी है और वह एक साल से खो गयी है क्या तुम उस जादुई नदी से मांग सकते हो | तब अमरेश कहता है “तुम्हारी अंगूठी नदी में कैसे मिल सकती है, हम वहा कभी गए ही नहीं है ” |

पत्नी के कहने पर वह फिर से उस जादुई नदी में जाकर अपने हात डुबोकर कहता है “जब आप ने इतना दे ही दिया है तो मेरे पत्नी की अंगूठी भी दे दीजिये | वह जब पानी में से हात निकालता है तो अंगूठी उसके हात में होती है | तब उस नदी से आवाज अति हैं में एक जादुई नदी हु, अपने और अपने दोस्तों के लिए जब भी जो भी मांगोगे वह तुम्हे मिल जायेगा”, लेकिन याद रहे तुम अपने दुश्मन के लिए जो भी माँगोगे उसका दुगना तुम्हे मिलेगा |

अगर ऐसा है तो मेरा एक ही दुश्मन है, मेरा बड़ा भाई, रमेश जिसने मेरी जायदात हड़प ली है, मै चाहता हु उसका एक कमरे का घर दो कमरे का हो जाय | जब वह घर वापस आता है तो झोपडी एक बंगले में बदल जाती है |

उसका भाई सोचता है की इसके पास बड़ा मकान और धन आया कहा से आया | उस जादुई नदी के सहारे अमरेश और उसकी पत्नी गरीब लोगो की सेवा करने में लग जाते है | वह उस जादुई नदी के बारे में किसी को कुछ बताता नहीं है | पर किसी की कोही भी चीज खोई हो या किसी को कोही जरुरत होती है तो वह उस जादुई नदी के पास जाता है |

एक दिन उसके गांव के जमींदार का बच्चा खो गया, उसे कभी भी न पूछने वाला जमींदार भी उसके पास मदत के लिए आया तो अमरेश ने उसे दूसरे दिन आने को कहा, और रात को चुपचाप जादुई नदी के किनारे पहुंच गया |

जादुई नदी में उसने अपने हात डुबोया और कहा “ये जादुई नदी आजतक जमींदार ने मेरी कभी इज्जत नहीं की लेकिन उसका बच्चा खो गया है, बेचारा बहुत परेशान है उनका बेटा मिला दो | गांव के जमींदार का बेटा मिलने के बाद अमरेश की ख्याति चारो तरफ फ़ैल जाती है |

अब हर कोही उससे मदत मांगने पहुंच जाता है | उसकी ख्याति देखकर उसका भाई रमेश और उसकी पत्नी को जलन होती है | एक दिन गांव के किसान का बछड़ा खो जाता है | किसान के मासूम बच्चे को उस बछड़े से इतना प्यार होता  की वह बछड़े के खोने के दुःख से बीमार हो जाता है |

किसान अमरेश के पास आता है | उसके बेटे की हालत सुनकर अमरेश उसको दिलासा देता है की उअका बछड़ा कल सुबह मिल जायेगा | उसकी बाते उसका बढ़ा भाई रमेश चुपके से सुन लेता है | और रात को उअके घर से निकलते ही उअका पीछा करना शुरू कर देता है |

जादुई नदी मे से बघड़ा निकालते देख उसे सारी बाते समझ में आ जाती है | अमरेश के बछड़ा ले जाने के बाद वह तुरंत नदी के पास जाता है और जादुई नदी में हात डालकर कहता है “मेरे पत्नी को सर से लेकर पैर तक सोने से लाध दो” इतने गहने मुझे दो”, नदी में से गहने पाकर वह नदी को धन्यवाद कहता है | तब नदी उसे कहती है “मगर याद रहे तुम अपने दुश्मन के लिए जो भी मांगोगे उसका दुगना तुम्हे मिलेगा | तबं वह कहता है में सिर्फ अपने लिए माँगूँगा |

जब घर आने पर वह अपने पत्नी को गहने दिखता है तब लालची पत्नी का ठिकाना नहीं रहता है | उसके पत्नी कहती है की कुछ ऐसा करो की रमेश जादुई नदी के पास पहुंचना नहीं चाहिए, तब रमेश कहता है “क्या करू तुम ही बताओ, तुम्हारे कहने पर ही मैने अपने भाई की जायदाद हड़प ली थी, तब रमेश की पत्नी कहती है “उसे अपाहिज या अदमरा करदो ” |

दूसरे दिन रमेश ख़ुशी-ख़ुशी उस जादुई नदी के पास पहुँचता है | और अपने हा तो को नदी में डुबोकर कहता है “मेरे भाई को अदमरा बना दो ताकि वह नदी के पास आये ही नहीं, तब नदी में से आवाज आती है “तुम ने बहुत बड़ी गलती कर दी है रमेश, मैंने पहले ही कहा था जो भी तुम अपने दुश्मन के लिए मांगोगे उसका दुगना तुम्हे मिलेगा”  तुमने कहा तुम्हारे दुश्मन को अदमरा कर दो अब तुम पुरे मारे जाओगे” |

लालच में रमेश को जादुई नदी की कही बात याद ही नहीं रही, तो हमने क्या सीखा कभी भी किसी भी चीज से कुछ मिलने लगे तो उअके शर्तो को मत भूलना चाहिए वरना उसका नुकसान हमें ही होगा |

इस कहानी को पढ़ने के लिए धन्यवाद |

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