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जादुई पंखे की कहानी | Pankhe ki Kahani, Purani khaniya

एक समय की बात है, एक गांव में दो भाई रहते थे | बड़ा भाई बहुत आमिर था, और छोटा भाई बहुत गरीब था | बड़े भाई को अपने अमिरी पर बहोत घमंड था | वह अपने छोटे भाई की कभी मदत नहीं करता था | ना ही उसे इस लायक समझता, की उससे बाद भी की जाय | एक बार होली का त्यौहार था | सब लोग होली के पकवान बनाकर रंग खेल रहे थे | किन्तु छोटे भाई के घर पेट भर खाने के लिए भी खाना भी नहीं था | छोटे भाई ने कोई रास्ता न देखकर सोचा बड़े भाई से ही मदत मांगी जाय | वो बड़े भाई के घर गया |

उसने अपने बड़े भाई से कहा “आदरणीय प्यारे भैया आज त्यौहार का दिन है, लेकिन घर में खाने केलिए एक भी आनाज का दाना नहीं है, दया करके कुछ अनाज देने की कृपा करे ताकि में भी अपने परिवार का पेट भर सकू” | परंतु बड़े ने छोटे भाई का अपमान करके उसे भेज दिया | छोटा भाई बहोत निराश होकर उदास अपने घर को लौट रह था, तभी उसको रास्ता में एक बूढ़ा व्यक्ति मिला | उस व्यक्ति ने छोटे भाई को रोका और कहा “आज त्यौहार का ख़ुशी का दिन है, तुम इस प्रकार मुँह लटकाके कहा जा रहे हो? पर इस तरह क्यू उदास हो ? बोलो बेटा तुम क्यू रो रहे हो ? सहानभूति के प्यार भरे शब्द सुनकर उस छोटे भाई ने अपने बड़े भाई के दुर्व्यवहार के बारे में सब कुछ बता दिया | 

उस बूढ़े व्यक्ति ने छोटे भाई को कहा “देखो निराश न हो अगर तुम मेरी लकडिया का गट्टा मेरे घर तक पहुंचाने में मेरी मदत करो तो में तुम्हे एक ऐसा उपाय बतावुंगा  जिसे की तुम बहोत आमिर बन जावोगे, और तुम्हे किसी के भी मदद मांगने भी नहीं पड़ेगी | छोटा भाई मान गया, और उसने लकड़ियों का बोझ उठाया और उसे लेकर बूढ़े व्यक्ति के घर पहुंचा दिया | पहुँचाने के बाद उस भूढ़े व्यक्ति ने उसे मिठाई का डिब्बा दिया, और कहा “तुम पास के जंगल के उत्तर की दिशा में जावो, वह तुमको एक गुफा दिखेगी उसमे घुसने के बाद तुम्हे कुछ नन्हे-नन्ने बौने लोग मिलेंगे उन लोगो को ये मिठाई बहुत पसंद है, वे मिठाई के बदले तुम्हे कुछ भी देने को तैयार हो जायेंगे तुम उन्हें मिठाई के बदले जादुई पंखा मांग लेना” | 

गरीब भाई ने उस बूढ़े की बात को मान लिया और वे उस गुफा में  पहुंचा | वहा उसने बौने व्यक्तियों को देखा | उसमे से एक बौने ने उस गरीब भाई को कहा “सुनो मित्र तुम यहाँ कैसे ? क्या तुम यह मिठाई  मुझे दोगे ? में तुम्हे इस मिठाई के बदले कुछ भी दे सकता हु” |  छोटे भाई ने कहा “हा मिठाई तो में तुम्हे दे दूंगा पर बदले में मुझे जादुई पंखा चाहिए, क्या आप मुझे देंगे? उस बोने  व्यक्ति ने कहा “हाँ अवश्य..  पर याद रखना ये जादुई है, और इसके कुछ नियम है, ध्यान से सुनो तुम्हे जो भी चाहिए तुम इससे मांग सकते हो जब भी तुम्हे किसी चीज़ की जरुरत हो तो पंखे को घूमनाऔर मांग लेना जब भी तुम पंखा बंद करना चाहो उसके ऊपर एक लाल कपडा दाल देना पंखा बंद हो जायेगा वर्णा ये चलता ही रहेगा और सब कुछ नष्ट कर देगा समजे”।

गरीब भाई ने पंखा लिया और बौने को धन्यवाद कहकर घर वापस आया | घर पहुँचने के बाद उस गरीब भाई ने पंखा घुमाते हुए सबसे पहले कहा “पंखा-पंखा पांच प्रकार के व्यंजन दो” | पंखा ये सुनते ही घूमना शुरू हो गया और तरह-तरह के व्यंजन बाहर आने लगे | भाई ने उसके ऊपर तुरंत लाल कपडा दाल दिया, और पंखा बंद हो गया | उसके बाद उस गरीब भाई के परिवार ने उस दिन पेट भर के खाना खाया और सब सो गये |

पंखे के मदद से वे हर दिन कुछ न कुछ सोना चांदी मांगता और बेचने बाजार जाया करता था | धीरे-धीरे वह अपने बड़े भाई से भी ज्यादा आमिर बन गया |  बड़ा भाई छोटे भाई तरक्की देखकर जलने लगा और वे सोचने लगा की ‘जो कुछ दिनों पहले खाने के लिए भिक मांगने केलिए मेरे पास आया था वो आज अचानक कैसे आमिर बन गया | छोटे भाई की असलियत जानने के लिए वे चोरी चुपके छोटे भाई के घर गया | जब उसने पंखे से सोना चांदी निकलते हुए देखा तो वह चौक गया |

दूसरे दिन जब छोटे भाई के घर पर कोई नहीं था तो उसने पंखे को चुरा लिया और वह अपने परिवार के साथ नाव में बैठकर दूसरे देश के लिए निकल पड़ा बड़े भाई की पत्नी बहोत चिंतित थी | तो आखिर इस साधारण पंखे में ऐसा क्या है ? जिसकी वजह से मेरा पति पूरा घर जायदाद छोड़कर पंखे को लेकर दूसरे देश में  ले आने की सोच रहा है | नाव पर ही उसके पत्नी ने उस पंखे के विषय में पूछा तो उसके पति ने उसी समय पंखे को आदेश दिया “पंखे मुझे सोना चांदी चाहिए  शुरू हो जावो | पंखा शुरू हो गया और तेज़ गति से सोना चांदी बाहर आने लगे | सोना चांदी इतना हो गया की नाव डूबने लगी और बड़ा भाई का परिवार पानी में नाव के साथ डूब गया | क्यू की बड़े भाई ने पंखे को चालू होता हुए देखा था परन्तु उसे उसको बंद करने का तरीका नहीं पता था और यही उसके अंत का कारन बना |

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