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जादुई पेड़ की कहानी | Magic Tree Story in Hindi | Hindi Kahaniya

सीतापुर नाम के गांव में एक सुधाकर नाम का माली अपने परिवार पत्नी सुलोचना और बेटी रोहिणी के साथ रहता था | रोहिणी बहुत ही अच्छी बच्ची थी | वह अपने माता पिता के साथ बगीचे की देखभाल करती थी और उनके साथ फूल बेचने बाजार भी जाती थी | रोहिणी कक्षा सात में पढ़ती थी | उसे नए-नए पौधे लगाने का बहुत शौक था |

एक दिन रोहिणी स्कूल में खेल रही थी | तभी उसकी नजर एक पौधे पर पड़ी, जिसमे लाल रंग का बहुत ही सुंदर फुल लग रहा था | रोहिणी ने उस पौधे को बड़ी आराम से उखड़ा और अपने घर ले गयी | घर आते ही उसने अपनी माँ से कहा “माँ देखो में क्या लायी हु, तब माँ ने कहा “क्या लायी है मेरी बेटी”, तब रोहिणी ने कहा “यह पौधा देखो इसमें कितना सुंदर फूल है, अब में इसको हमारे बगीचे में लगाउंगी | बाद में दोनों माँ और बेटी ने उस पौधे को बगीचे में लगा देते है | अब धीरे धीरे वह पौधा बड़ा होने लगता है और कुछ दिन बाद पेड़ में बदल जाता है |

जब उसमे बहुत सारे फूल लगते है तो उन फूलो की खुशबू बहुत दूर दूर तक फ़ैल जाती है, और रात को उस पेड़ से बड़ी चमकदार रोशनी निकलती है | उस पेड़ के फूल की ये खासियत होती है की उसके फुल पेड़ से निचे गिरने के बाद भी मुरझाते नहीं थे | उस कारन सुधाकर के फुलो की बिक्री ज्यादा होने लगती है | एक दिन शहर से कुछ लोग गांव में आते है वे सुधाकर के बगीचे के सामने से निकलते है और उनको उस पेड़ के आस पास से बाहूत रोशनी दिखाई देती है और उन पेड़ के फूलो की खुशबु उने बगीचे में खींच लाती है |

वे सुधाकर के घर के पास जाकर पूछते है “कोही है” तब सुधाकर और उसका परिवार बाहर निकलकर आता है | सुधाकर उनसे पूछता है “जी आप कौन” तब उनमे से एक आदमी कहता है “हम शहर से इस गांव में कुछ दिनों के लिए आये है, इस पेड़ की चमक और खुशबू हमें यहाँ खींच लायी”. ये पेड़ कहा से मिला तुम्हे, क्योंकी ऐसा पेड़ हमने आजसे पहले कभी नहीं देखा” | तब सुधाकर ने बताया की ये पेड़ मेरी बेटी रोहिणी लेकर आयी थी, ये अलग ही पेड़ है | इसके बाद वे लोग चले जाते है लेकिन उनकी नजर उस पेड़ पर रहती है |

एक दिन सुधाकर की तबियत बहुत ख़राब हो जाती है | सारे डॉक्टर जवाब दे चुके होते है | रोहिणी बहुत दुःखी होकर उस पेड़ के निचे जाकर बैठ जाती है | इतने में उसे एक आवाज आती है “क्या हुवा रोहिणी क्यों रो रही हो” रोहिणी डर जाती है और कहती है “कौन है” तब फिर से वही आवाज आती है “मै पेड़ हु जिसके निचे तुम बैठी हो” रोहिणी कहती है “तुम बोल सकते हो” | तब पेड़ कहता है ” हा…. मै एक जादुई पेड़ हु, बताओ मुझे क्या हुवा है” |

तब रोहिणी कहती है “मेरे पिताजी की तबियत बहुत ख़राब है, और में अपने पिताजी को खोना नहीं चाहती” तब पेड़ कहता है “तुम घबराओ मत एक काम करो मेरे चार फूल और चार पत्ते लो उनका काढ़ा बना कर अपने पापा को पीला दो”,वो तुरंत ठीक हो जायेगे, लेकिन किसी को कुछ बताना मत” | पेड़ के बताने पर रोहिणी ऐसा ही करती है और इतना करते ही रोहिणी के पापा ठीक हो जाते है |

मुसाफिरों की नजर हमेशा उस पेड़ पर रहती है और वे लोग उस पेड़ को लेजाने की योजना में रहते है | एक दिन सुधाकर और उसका परिवार घूमने के लिए गांव के मेले में जाते है | इधर मुसाफिर सुधाकर के बग़ीचे में आते है और उस पेड़ को काटने लगते है | लेकिन जैसे ही वह पेड़ को काटने की कोशिश करते है उन्हें करंट लग जाता है | वे लोग डर जाते है उसी वक्त सुधाकर और उसका परिवार मेले में से वापस आ जाते है | तब सुधाकर कहता है “आप लोग भाग क्यों रहे हो, क्या हुवा” |

तब एक आदमी कहता है “हम इस पेड़ को काटने आये थे, हमने सोचा हम इस पेड़ को बेचकर आमिर हो जायेगे क्योकि यह एक जादुई पेड़ है, लेकिन हमें अब समज में आ गया की हम गलत थे, हमें माफ़ कर दीजिये”, इतना कहकर वो यहाँ से भाग जाते है |

रोहिणी फिर अपने पिताजी को बताती है की “हा पिताजी यह एक जादुई पेड़ है और ये बात भी करता है, चलिए मै आपको इसके बारे में बताती हु | रोहिणी अपने माता पिता को उस जादुई पेड़ के पास लेकर जाती है और उससे बात कराती है और पेड़ भी रोहिणी से बात करता है यह देखकर उन्हे भी मालूम हो जाता है की यह एक जादुई पेड़ है | रोहिणी अपने पिताजी को यह भी बताती है की जब आप बीमार थे तभी इस पेड़ के फूलो और पत्तो ने आपको ठीक किया है, फिर सुधाकर उस पेड़ को उसकी जान बचाने के लिए धन्यवाद कहता है |

मुसाफिरों की नजर हमेशा उस पेड़ पर रहती है और वे लोग उस पेड़ को लेजाने की योजना में रहते है | एक दिन सुधाकर और उसका परिवार घूमने के लिए मेले में जाते है | इधर मुसाफिर सुधाकर के बग़ीचे में आ जाते है और उस पेड़ को काटने लगते है | लेकिन जैसे ही वह पेड़ को कटाने की कोशिश करते है उन्हें करंट लग जाता है | वे लोग डर जाते है और सुधाकर और उसका परिवार मेले में से वापस आ जाते है | तब सुधाकर कहता है “आप लोग भाग क्यों रहे हो, क्या हुवा” | तब एक आदमी कहता है “हम इस पेड़ को काटने आये थे, हमने सोचा हम इस पेड़ को बेचकर आमिर हो जायेगे क्योकि यह एक जादुई पेड़ है, लेकिन हमें अब समज में आ गया की हम गलत थे, हमें माफ़ कर दीजिये”, इतना कहकर वो यहाँ से भाग जाते है |

रोहिणी फिर अपने पिताजी को बताती है की “हा पिताजी यह एक जादुई पेड़ है और ये बात भी करता है, चलिए मै आपको इसके बारे में बताती हु | रोहिणी अपने माता पिता को उस जादुई पेड़ के पास लेकर जाती है और उससे बात कराती है और पेड़ भी रोहिणी से बात करता है यह देखकर उन्हे भी मालूम हो जाता है की यह एक जादुई पेड़ है | रोहिणी अपने पिताजी को यह भी बताती है की जब आप बीमार थे तभी इस पेड़ के फूलो और पत्तो ने आपको ठीक किया है, फिर सुधाकर उस पेड़ को उसकी जान बचाने के लिए धन्यवाद कहता है |

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