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जादुई लड्डू की कहानी | हिंदी कहानियाँ : Hindi Stories

सीतापुर गांव में गिरीधर नाम का एक लड्डू व्यापारी रहता था | वह बहुत बूढ़ा था लेकिन उस उम्र में भी वह बहुत मेहनत कर अपने बल पर जीता था | हर दिन गांव के सभी गलियों में जाकर वह लड्डू बेचता था | कुछ समय के बाद उम्र के कारन गिरीधर से लड्डू बेचने का काम नहीं हो रहा था | फिर वह गांव में ही मिठाई की दुकान खोलता है | सभी लोग उसके पास आकर लड्डू खरीदने लगे | लड्डू बेचकर जो कमाई होती उसपर ही गिरीधर अपना जीवन व्यतीत कर रहा था | गिरीधर बहुत ही अच्छा इंसान था | वह गरीब था लेकिन हमेशा दुसरो की मदत किया करता था |

हर दिन गिरीधर के दुकान पर लड्डू खरीदने अमोल नाम का लड़का आता था | कभी-कभी अमोल के पास पैसे नहीं हुवा करते थे, तब गिरीधर अमोल को मुफ्त में ही लड्डू देता था | अमोल एक अनाथ बच्चा था | वह गिरीधर को अपना दादा ही समझता था | हर रोज की तरह अमोल गिरीधर की दुकान पर जाता है | लेकिन उस दिन गिरीधर की दुकान बंद थी | अमोल कुछ ना सोचकर वहा से चला जाता हैं | अगले दिन अमोल फिर दुकान के पास जाता है, उस दिन भी दुकान बंद रहती है | वह कहता है “लगता है दादा आज भी नहीं आये, क्या हुवा होगा ” | कारन जानने अमोल गिरीधर के घर जाता है |

अमोल गिरीधर के घर आकर देखता है | अमोल को गिरीधर पलंग पर सोता हुवा दिखाई देता है | अमोल गिरीधर के पास जाकर कहता है “दादा आपको क्या हुवा, आप तो बहुत बीमार लग रहे है, आज भी आपने दुकान नहीं खोली” | गिरीधर कहता है “बेटा मेरी तबियत बहुत ख़राब हो गयी है” | अमोल कहता है “आप अकेले क्यों है “आपकी देखभाल करने के लिए कोही होगा तो उसे बुला लीजिये” | जवाब में गिरीधर कहता है “बेटा सब है, लेकिन में उनको तकलिफ नहीं देना चाहता हु, वो कभी मेरे पास नहीं आते, अब छोड़ो ये बातें क्या तुम मेरी मदत करोगे” |

अमोल कहता है “हा क्यों नहीं बताइये में क्या कर सकता हु” | गिरीधर कहता है “बेटा में सुबह से भूका हु क्या तुम मेरे लिए कुछ खाने को ला सकते हो, गिरीधर उसे कुछ पैसे देता है” | गिरीधर से पैसे लेकर अमोल वहा से निकालता है “और सोचता है दादा तो बहुत बीमार है, अब तो वह दुकान भी नहीं चला सकते, इनके पास तो पैसे भी बहुत कम बचे है, आनेवाले समय में दादा कैसे जियेंगे” अब मुझे इन पैसो को खर्च नहीं करना चाहिए | यही सोचकर अमोल निकल पड़ता है |

रास्ते में अमोल को देवी मंदिर के पास भीड़ दिखाई पड़ती है | उसे पता चलता है की वहा अन्नदान हो रहा है | अमोल सोचता है इन पैसो को खर्च न करके यही से दादा के लिए भोजन लेकर जाता हु | अमोल देवी माँ को प्रणाम करता है और वहा से खाना लेकर घर वापस लौटता है | रास्ते में से अचानक देवी प्रकट होती है और कहती है “बेटा तुम उस खाने को कहा ले जा रहे हो” | अमोल डरकर अपने आँखे बंद करता है, फिर आवाज सुनते ही वह आँखे खोलता है, और कहता है “गिरीधर दादा की तबियत ख़राब हो गयी है, में उनके लिए खाना ले जा रहा हु” | गिरीधर की सारी कहानी अमोल देवी को बता देता है | 

देवी प्रसन्न होकर कहती है “अमोल तुम बहुत अच्छे काम कर रहे हो, चिंता मत करो सब ठीक हो जायेगा | देवी एक लड्डू गिरीधर को खिलाने के लिए देती है और कहती है “इस लड्डू को गिरीधर को खिलाओ उसकी बीमारी दूर हो जाएगी” | लड्डू को देखकर अमोल को लगा अरे ये लड्डू तो वैसा ही है जैसा दादा बनाते है | अमोल उसे लड्डू को लेकर और देवी को प्रणाम करकर वहा से चला जाता है |

घर आकर अमोल गिरीधर से कहता है “दादा में आपके लिए भोजन लाया हु, लेकिन पहले आप इस प्रसाद को लीजिये, लड्डू को देखते ही गिरीधर को वही लगा, जो अमोल को लगा | अमोल गिरीधर से झूठ बोलता है की उसे यह लड्डू मंदिर में दिए है |

गिरीधर थोड़ा लड्डू खाकर बाकि लड्डू अमोल को दे देता है | लड्डू को खाते ही गिरीधर के अंदर ताकत आ जाती है | गिरीधर तुरंत खड़ा होकर इधर-उधर घूमने लगा और कहने लगा “अरे ये तो कुछ जादू की तरह है, मै एक नयी शक्ति का अनुभव कर रहा हु, मेरी तबियत ठीक हो गयी है” | अमोल उस बचे हुए लड्डू को घर के कोने में रख देता है | गिरीधर खाना खाकर सो जाता है |

अगले दिन सुबह उठते ही अमोल को घर में बड़े-बड़े बर्तनो में बहुत सारे लड्डू भरे हुए दिखाई दिए | इतने में गिरीधर भी उठा | इतने सारे लड्डुओं को देखकर गिरीधर बहुत ही आश्चर्यचकित हुवा | गिरीधर कहता है “ये क्या इतने सारे लड्डू, ये सच है या कोही जादू मझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है | गिरीधर एक लड्डू को लेकर खाता है | वह चौक गया और अमोल से कहता है “अरे ये लड्डू तो वैसा ही हे जैसा कल तुमने मुझे खिलाया था” | गिरीधर बहुत खुश हो गया | अमोल को लगा की उस प्रसाद में बहुत ही महिमा है | उसके कारण दादा ठीक हो गए है, और अब उनके सारे कष्ट भी दूर हो गए है |

यह बात सच है की हमारा अच्छा व्यक्तित्व ही हमारा साथ देता है | गिरीधर ने अमोल से कहा “बेटा यह सब तुम्हारे कारन हुवा है, तुमने ही उस लड्डू को मुझे दिया, तुम बहुत अच्छे हो, तुम्हारे माँ बाप तुमपे बहुत गर्व करेंगे, अब घर जावो वह तुम्हारा इंतजार कर रहे होंगे | अमोल उदास हो गया, और बोला “दादा में अनाथ हु मेरा इस दुनिया में कोही नहीं है” | अमोल की बाते सुनकर गिरीधर को बहुत दुःख हुवा और उसने अमोल से कहा “आज ते में तुम्हारे साथ हु, तुम मेरे साथ ही मेरे घर में रहो” |

अगले दिन सुबह गिरीधर अपनी दुकान फिर से शुरू करता है | दुकान भी बहुत अच्छी तरह से चलती है | गिरीधर अमोल को स्कूल में दाखिला करावा देता है | अमोल का बहुत अच्छी तरह से पालन पोषण कर उसे बड़ा करता है | अमोल पढ़ाई कर एक अच्छा इंसान बनता है | अब अमोल दादा से कहता है दादा आप ही मेरे भगवान हो, आज में जो कुछ भी हु वो आप ही की कृपा से है आपसे मैंने बहुत कुछ सिखा, में यहाँ के अनाथ बच्चो की सहायता करना चाहता हु, उनको अच्छी शिक्षा और कपडे देना चाहता हु, ऐसा करने से मुझे ख़ुशी मिलती है |

सिख: यदि हम कुछ भी काम को अपना पूरा मन और दॄढ इच्छा से करेंगे तो, उसका परिणाम हमें बहुत ख़ुशी देता है | इस कहानी में गिरीधर के जीवन में भी यही हुवा वह फिर से उम्मीद रखकर मिठाई की दुकान शुरू कर बहुत अच्छा फल पाया |

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