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देवकन्या की कहानी | Devakanya ki Kahani in Hindi

एक गांव में अभिजीत नाम का एक व्यक्ति उसके पत्नी के साथ रहता था | अभिजीत का स्वाभाव बहुत मेहनती था और बहुत मन लगाकर काम किया करता था | लेकिन वह ज्यादा पैसे नहीं कमा पता था | गांव के लोग उसे जो भी काम दिया करते थे वह बड़ी लगन से उसे करता था | जो भी पैसा अभिजीत कमाता था उससे वह अपना घर चलाता था | हर दिन की कमाई उसके जरूरतों के कारण ख़त्म हो जाया करती थी | अगर अभिजीत को किसी दिन काम नहीं मिलता था तो उस दिन उसका घर नहीं जरूरते पूरी नहीं होती थी | अभिजीत मेहनत करके थोड़े-थोड़े पैसे कमाया करता था |

कुछ दिन बाद गर्मियों का मौसम आ गया | अभिजीत को कही भी काम नहीं मिल रहा था | उसका घर चलना मुश्किल हो गया था | अभिजीत और उसकी पत्नी इस वजह से बहुत ही परेशांन रहा करते थे | एक दिन अभिजीत के पत्नी ने कहा

सुनिए क्या इस गर्मियों के मौसम में हमें भूका ही रहना पड़ेगा |

अभिजीत : हम और कर भी क्या सकते है | इतनी मेहनत करने के बाद भी हमारी मुसीबते कम ही नहीं हो रही है और कोही काम भी तो नहीं मिल रहा है |

अब तुम ही बताओ में क्या करू ?

पत्नी : हमारे आम के पेड़ पर बहुत अच्छे आम लगे है | आप ऐसा कीजिये उन आम को बाजार में जाकर बेच दीजिये शायद कुछ पैसे आ जाए |

अभिजीत : तुम ठीक कह रही हो, आज से में वैसा ही करता हु |

उस दिन के बाद अभिजीत आम तोड़कर गांव के बाजार में बेचा करता था | आम बेचकर जो कुछ पैसे मिला करते थे उनसे वह उसका घर चलाता था | इस तरह कुछ समय दिन बित गए | रोज की तरह अभिजीत आम के पेड़पर चढ़कर आम तोड़ रहा था | उस पेड़ के एक डाल पर एक तोता उसे नजर आया | अभिजीत पेड़ पर से आम तोड़ रहा था लेकिन पेड़ के डाल पर बैठा तोता वहा ही बैठा था | अभिजीत बहुत ही हैरानी से उस तोते को देख रहा था | फिर अभिजीत ने दिखा की उस तोते के पैर पर एक घाव था इसलिए वह तोता वहा से हिल नहीं रहा था |

फिर अभिजीत उस पेड़ से निचे उतरकर अपने पत्नी को बुलाता है

अभिजीत : अरे सुनती हो जल्दी से यहाँ आवो, यह देखो इस तोते के पैर पर घाव है जिसके वजह से यह उड़ नहीं पा रहा है |

पत्नी : अरे हां इसे तो घाव है और बेचारा बहुत तकलीफ में है | आप उसे सावधानी से पकड़कर यहाँ लेकर आईये हम उसके घाव पर पट्टी करेंगे |

अभिजीत पेड़ पर चढ़कर तोते को अपने हातो से पकड़कर पेड़ के निचे लेकर आता है और अभिजीत और उसकी पत्नी तोते को घर के अंदर लेकर जाते है और उसके घाव पर मरहम पट्टी लगाते है | तोते के लिय वह एक घौसला बनाकर उसे उसमे रख देते है उसे रोज खाना भी खिलाया करते थे | कुछ दिन बाद उसे तोते का पैर ठीक हो गया और वह इधर-उधर उड़ने लगा | उस दिन भी अभिजीत ने तोते को आम खिलाय थे | तोता उन दोनों आमो को खाकर फिर चीखने लगा | अभिजीत ने तोड़े हुए आम की टोकरी बेचने के लिए राखी हुयी थी |

उस तोते के चीखने की आवाज सुनकर अभिजीत के पत्नी ने दो आम फिर उस तोते को दिय | तोता उन आमो को भी खाकर फिर से आवाज निकालने लगता है जैसे उसे और आम चाहिए | तोता उस आम के टोकरी के तरफ ही देख रहा था | अभिजीत को पता चल गया की तोते को और भूक लगी है | अभिजीत को यह बात पता थी की आम को बेचने पर ही उनका घर चल सकता है | लेकिन फिर भी अभिजीत को तोते की तरफ देखकर बहुत दया आ गयी | फिर अभिजीत ने कहा

अभिजीत : तोता कितना भूका है देखा तुमने उसने कितने आम खा लिए |

पत्नी : हां आप सही कह रहे हो

अभिजीत : हमने भी पैसो के कमी के वजह से कितने दिन भूके गुजारे है उस तोते पर मुझे बहुत तरस आ रहा है | उसकी भूक मिटाना अब हमारे लिए जरुरी है | तुम ऐसा करो यह आम की टोकरी उसके सामने रख दो | जितने आम वह खा पायेगा पहले उसे खाने दो फिर जो बचेंगे उससे हम अपना गुजारा कर लेंगे |

पत्नी : ठीक है जी |

इस तरह अभिजीत की पत्नी आम के टोकरी को तोते के सामने रख देते है | तोता आम खाना शुरू कर देता है | दोनों पति और पत्नी हैरानी से उस तोते के तरफ देख रहे थे | वह तोता एक-एक करके सारे आम खा लेता है |

यह देखकर अभिजीत और उसकी पत्नी यह सोचने लग गय की यह तोता इतना छोटा है लेकिन इतने सारे आम वह कैसे खा सकता है | अभिजीत और उसकी पत्नी एक दूसरे की तरफ देखने लगे | दोनों देख ही रहे थे तब वह तोता एक देवकन्या में बदल गया | वह दोनों पति पत्नी बड़े हैरानी से देख रहे थे |

दोनों को समझ ही नहीं आ रहा था की यह सपना है या सचाई तब उस देवकन्या ने कहा |

देवकन्या : में एक देवकन्या हु मुझे एक जादूगर ने शाप दिया था जिसके वजह से में एक तोता बन गयी थी | और मुझे शाप से मुक्ति तब मिल सकती थी जब में पेट भर कर खाना खाउंगी उस दिन मुझे मेरे शाप से मुक्ति मिल जाएगी ऐसा मुझसे उस जादूगर ने कहा था | लेकिन में जब भी किसी भी बाग़ में जाती थी वहा से मुझे भगा दिया जाता था | लेकिन आज आप लोगो ने मुझे पेट भर के खाना खिलाया है और मुझे मेरे शाप से मुक्ति दिलाई है | आप लोगो ने आप के भूक के बारे में नहीं सोचा और मुझे खाना खिलाया आप लोगो ने मेरी मदत की है | इसलिए में आप लोगो को वरदान देती हु की अगली बार आप लोग पेड़ से जितने आम तोड़कर टोकरी में डालेंगे वह सारे आम सोने के बन जायेंगे | लेकिन याद रहे ऐसा सिर्फ एक ही बार होगा |

ऐसा कहकर देवकन्या वह से गायब हो जाती है | अभिजीत और उसके पत्नी को यह एक सपना लगा रहा था | दूसरे दिन सुबह को अभिजीत आम तोड़कर टोकरी में डाल रहा था | देखते ही देखते वह सारे आम सोने के बन जाते है | अभिजीत और उसकी पत्नी वह सारे आम लेजाकर घर में छुपा देते है | फिर थोड़ा-थोड़ा करके उन आमो को सोनार के पास बेच देते है | उन पैसो से घर की जरुरत की चीजे खरीदा करते थे |

उस दिन से अभिजीत और उसकी पत्नी पेट भरकर खाना खाते और भूके लोगो की सेवा किया करते थे | उन सोने के आम के पैसो से उसने खेत भी खरीद लिया था और अपने लिए बड़ा सा घर भी बना लिया | अभिजीत और उसकी पत्नी बहुत खुश होकर जीने लगे |

तो इस कहानी से हमें क्या सिख मिली मुश्किल वक्त में मदत करना बहुत बड़ी बात है |

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