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परिश्रम का फल जरूर मिलता है | Hindi Kahaiya Web | Hindi Stories

विश्वनाथ और गोपिनाथ दोनो ही बहुत अच्छे दोस्त थे | उनके गांव में सभी लोग उनके दोस्ती को देखकर बहुत खुश होते थे | विश्वनाथ बहुत ही धार्मिक विचारो वाला था और गोपिनाथ बहुत ही परिश्रमी और मेहनती था | उन दोनों ने मिलकर एक दिन आधा बिगा जमींन खरीद ली | उनका एक ही उद्देश्य था की खेती करके बहुत पैसा कामना और आमिर बनना | गोपिनाथ ने विश्वनाथ से कहा

गोपिनाथ : सुनो मेरे भाई विश्वनाथ अगर हम मन लगाकर परिश्रम करेंगे तो हमारी फसल बहुत अच्छी आएगी और हमें खुप मुनाफा होगा |

गोपिनाथ की बाते सुनकर विश्वनाथ कहता है |

विश्वनाथ : अगर ऊपर वाले की इच्छा हुयी तो जरूर होगा |

दोनों ने अपने अपने विचार बताये और चले गए | उस जमींन पर गोपिनाथ बहुत मेहनत करने लगा जैसे की मिट्ठी खोदना, पत्थर उठाना, घास काटना, बीज डालना इस तरह वह खेत में काम करने लगा | विश्वनाथ रोज मंदिर जाता था और अपने लिए भगवान से आशीर्वाद मांगता था | उसने सोचा इंसान जो कुछ भी करता है वह भगवान के इच्छा से ही होता है और भगवान के आशीर्वाद से सारे काम आसान होते है |

धीरे-धीरे समय बिताने लगा | खेतो में हर तरफ हरियाली नजर आने लगी तब गोपिनाथ कहता है |

गोपिनाथ : देखा विश्वनाथ कितनी अच्छी फसल उगी है |

तब विश्वनाथ कहता है

विश्वनाथ : यह तो सारा भगवान का आशीर्वाद है | उसके कारन ही इतनी अच्छी फसल उगी है में तो रोज भगवान को याद करता हु |

गोपिनाथ ने विश्वनाथ से कुछ भी नहीं कहा वो सिर्फ मन लगाकर अपना काम करता रहा | और कुछ दिन बाद फसल उग आयी | जमींन सुनहरे फसल से भर गई | विश्वनाथ और गोपिनाथ फसल देखकर बहु खुश हुए |

विश्वनाथ ने आसमान के तरफ हात जोड़कर कहा

विश्वनाथ : हे भगवान आप के आशीर्वाद से यह सब संभव हुवा है | यह सब आप के आशीर्वाद का ही तो फल है सच है ना, सुनो गोपिनाथ उपरवाले के आशीर्वाद के बिना कुछ संभव नहीं है |

गोपिनाथ बिना कुछ कहे वहा से चला जाता है | अब फसल बेचने का समय आता है | फसल बेचने के बाद उन दोनों को बहुत लाभ हुवा | लेकिन अब पैसो के बटवारे को लेकर दोनों में अड़चन उत्पन हुयी तब विश्वनाथ ने कहा

विश्वनाथ : भाई गोपिनाथ ऊपर वाले के इच्छा से हमें इतना लाभ हुवा है क्यों न हम पैसो का बटवारा कर ले क्या क्या कहना है तुम्हारा

गोपिनाथ : देखो भाई जमींन पर बीज डालने से लेकर फसल काटने तक मैने बहुत परिश्रम किया है तो मेहनत का भी तो कोही मूल्य होता है ना तो पैसो में से ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए तुम कुछ भी कहो लेकिन पैसो का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए |

विश्वनाथ : लेकिन हमने जो ऊपर वाले से आशीर्वाद माँगा था क्या उसके बिना यह संभव था इसलिए ज्यादा हिस्सा मुझे मिलाना चाहिए |

कुछ देर बाद दोनों में बहस होने लगी | पहली बार फसल के बात को लेकर उन दोनों में झगड़ा और विवाद शुरू हुवा | दोनों ही गांव के सरपंच के पास गए और कहा

सरपंच : जरा सुनो तुम दोनों को में एक काम देता हु तुम दोनों में से जो इस कठिन काम को कर लेगा वही पैसो का ज्यादा हिस्सा पायेगा बोलो क्या तुम्हे मेरा यह न्याय मंजूर है | सरपंच की बाते सुनकर दोनों ने उस कठिन काम को करने के लिए हां कहा |

फिर सरपंच ने दोनों की एक बोरिया दी और कहा

सरपंच : इन बोरियो में कंकड़ मिलाया हुवा चावल है | कल सुबह कंकड़ अलग और चावल अलग करके लाना होगा में तुम दोनों का काम देखकर न्याय करूँगा ठीक है |

विश्वनाथ और गोपिनाथ दोनों बोरिया उठाकर ले जाते है | विश्वनाथ बोरी को मंदिर में रख देता है और मन ही मन सोहता है हे भगवान अगर आपका आशीर्वाद रहा तो सब संभव होगा यह फिर से साबित हो जायेगा की आपके आशीर्वाद के बिना यह संभव नहीं है |

लेकिन गोपिनाथ रात को दिया जलाकर चावल और कंकड़ अलग करने लगा | विश्वनाथ उपरवाले के लिए बोरी रखकर सो जाता है |

अगले दिन सुबह गोपिनाथ ने जितना कंकड़ चावल अलग कर पाया उतना लेकर वह मुखिया के पास आया और कहा

गोपिनाथ : सुनिए सरपंच जी पूरा काम तो नहीं हो पाया कुछ बाकी है |

फिर सरपंच जी उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगे और कहा “अब विश्वनाथ ने क्या किया है यह मुझे देखना है उसके बाद न्याय करूँगा” |

उधर विश्वनाथ ऊपर वाले पर भरोसा करकर मंदिर गया और बोरी लेकर सरपंच के पास गया | उसे देखकर सरपंच ने कहा

सरपंच : क्या तुमने पुरे बोरी के चावल में से कंकड़ अलग किये है |

विश्वनाथ : नहीं सरपंच जी मैंने सारा काम भगवान के भरोसे छोड़ दिया था | भगवान का आशीर्वाद मुझे जरूर प्राप्त होगा |

सरपंच : तो तुमने अपने दोनों हातो का उपयोग नहीं किया भगवान् के भरोसे सब छोड़ दिया | तो फिर में देखता ही की भगवान ने सब काम सही किया है या नहीं

सरपंच के कहने पर विश्वनाथ ने बोरी खोली उसमे जैसे कंकड़ भरे हुवे थे | थी वैसे भी अभी भी है यह देखकर सरपंच ने कहा

सरपंच : ऊपर वाले ने सबको दो हात दिये है काम करने के लिए और यही भगवान का आशीर्वाद है | भगवान उन्हें ही आशीर्वाद देते है जो मेहनत करते है इसलिए गोपिनाथ के मेहनत से ही तुम्हारी फसल अच्छी आयी थी | तुमने कोही मेहनत नहीं की इसलिए पैसो का ज्यादा हिस्सा गोपिनाथ को ही मिलेगा |

विश्वनाथ सब समझ गया उसने क्या भूल की है | वह यह बात समझ गया | फिर सरपंच ने कहा

सरपंच :विश्वनाथ अगर तुम गोपिनाथ से हात मिलकर काम करते तो फिर तुम्हारी फसल और ज्यादा अच्छी होती और तुम्हे ज्यादा लाभ होता | उसके बाद विश्वनाथ और गोपिनाथ खेत में परिश्रम करने लगे | उस साल और ज्यादा फसल हुयी और उन्हें बहुत ज्यादा लाभ हुवा फिर उनके बिच बटवारे को लेकर कोही विवाद नहीं हुवा |

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