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भगवान के भरोसे नहीं रहना चाहिए | Motivational Hindi Kahani

राधापुर गांव में रामेश्वरम नाम का पंडित रहता था | रामेश्वरम बहुत ही आलसी था और हर काम को भगवान के भरोसे छोड़ दिया करता था | एक दिन गांव में पंचायत की बैठक हुयी जिसमे सरपंच ने गांव के सारे लोगो को बुलाया उस पंचायत में आलसी रामेश्वरम भी आया था | तभी पंचायत का सरपंच बोला

सरपंच : हमारे गांव में एक बहुत बड़ी समस्या हो गयी है |

तभी विकास नाम के एक व्यक्ति बोला

विकास : क्या बात हो गयी सरपंच जी क्या समस्या हो गयी है |

सरपंच : गांव के नदी पर जो बाँध बना है उसमें दरार आ गयी है |

तब कमला नाम की औरत कहती है

कमला : अगर वह बांध टूट गया तो क्या होगा |

सरपंच : अगर बांध टूट गया तो हमारा यह हसता खेलता हुवा गांव पानी में डूब जायेगा |

सरपंच की बाते सुनकर रामेश्वरम बोला

रामेश्वरम : तुम गांववाले इतनी चिंता क्यों कर रहे हो | सबकुछ भगवान के भरोसे छोड़ दो भगवांन ही हम लोगो को बचाएंगे |

विकास : अरे हम भगवांन के भरोसे नहीं रह सकते है | हमें कुछ करना चाहिए |

कमला : सरपंच जी आप जिलाधिकारी से इसके बारे में बात कीजिये वह जरूर हमारी मदत करेंगे |

सरपंच : तुम ठीक कह रही हो, में आज ही जाकर उनसे मिलकर इसके बारे में बात करता हु | वो कोही ना कोही हल जरूर निकालेंगे |

उसके बाद सरपंच और गांव के कुछ लोग जिलाधिकारी के पास गए और उनके सामने गांव की समस्या रख दी | जिलाधिकारी और कुछ वरिष्ठ अधिकारियोंने जब बाँध का निरिक्षण किया तो उसने गांव में घोषणा करवा दी |

सुनो गांव के सभी लोग सुनो जल्दी से इस गांव को खाली कर दो नदी के बाँध की दिवारे बहुत कमजोर हो गयी है | बांध कभी भी टूट सकता है |

घोषणा सुनकर गांव के बिच भगदड़ मच गयी और गांव के सभी लोग अपना कीमती सामान लेकर गांव से बाहर जाने लगे | लेकिन रामेश्वरम को इस सब से कोही फर्क ही नहीं पड़ा | वो तो आराम से मंदिर के सीढ़ियों पर बैठा हुवा था | तभी वहा से कमला नाम की एक औरत गुजरी और उसने रामेश्वरम से कहा

कमला : पंडित जी क्या आप गांव छोड़कर नहीं जा रहे है | आप को तो पता ही है ना की बाँध टूटने वाला है |

रामेश्वरम : बांध को जब टूटना होगा तब टूट जायेगा तो में क्यों गांव छोड़कर जाऊ | मुझे तो भगवान ही बचाएंगे |

रामेश्वरम की बाते सुनकर कमला वहा से चली गयी | अब बाढ़ का पानी धीरे-धीरे गांव में घुसने लगा | लेकिन रामेश्वरम मंदिर से नहीं गया | पानी का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा | रामेश्वरम मंदिर के सीढ़ियों पर और उचा जाकर बैठ गया | लेकिन गांव से नहीं गया | तभी विकास वहा घोडा गाड़ी लेकर रामेश्वरम के पास आया और बोला |

विकास : सुनिए पंडित जी जल्दी से आप मेरे साथ चलिए नहीं तो आप बाढ़ में डुब जायेंगे | पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है |

रामेश्वरम : पानी आता है तो आने दो हम तुम्हारे तरह नहीं है | जो मुसीबत से डरकर भाग जाय मुझे मेरे भगवान पर पूरा भरोसा है | मुझे तो मेरे भगवान ही बचाएंगे |

रामेश्वरम की बाते सुनकर विकास अपनी घोड़ागाड़ी लेकर वहा से चला जाता है | उसके बाद पानी का स्तर और बढ़ गया जिसमे गांव के छोटे घर और पेड़ ड़ूब ही गए थे | तभी रामेश्वरम मंदिर के सीढ़ियों से मंदिर के अंदर जाकर बैठ गया | तभी वह एक नाविक अपनी नाव लेकर वहा आया और बोला |

नाविक :  सुनिए रामेश्वरम जी जल्दी से मेरे नाव में आवो वरना इस पानी में ड़ूब जावोगे | पानी का बहाव और तेज हो रहा है |

रामेश्वरम : अरे नहीं में यही ठीक हु, मुझे तो मेरे भगवान बचा लेंगे तुम जावो |

यह सुनकर नाविक भी वह से चला गया | अब तो पानी के स्तर के साथ ही पानी का बहाव भी तेज हो गया था |

गांव की सारी झोपड़िया और सारे पेड़ डूब चुके थे | मंदिर की मात्र चोटी ही दिखाई दे रही थी और उसपर रामेश्वरम बैठा हुवा था | उसके चारो तरफ पानी था बचने का कोही रास्ता नहीं था | तब रामेश्वरम को अपने तरफ एक हेलीकॉप्टर आते हुए दिखा और उसमे से एक सैनिक ने रामेश्वरम के तरफ रस्सी फेकि और कहा |

सैनिक : जल्दी से इस रस्सी को पकड़ लो हम तुम्हे ऊपर की तरफ खींच लेंगे |

रामेश्वरम : नहीं में इस रस्सी को नहीं पकडूँगा में मेरे भगवान का बहुत बड़ा भक्त हु और भगवान मुझे बचने जरूर आएंगे |

सैनिक : आप इस रस्सी को पकड़ लीजिये नहीं तो आप पानी में दुब जायेंगे |

रामेश्वरम को बचाने आये हुए सैनिक के बार-बार समझाने के बाद भी वह नहीं गया और पानी के स्तर बढ़ने के कारन वह पानी में डूबकर मर गया | मृत्यु के बाद जब रामेश्वरम भगवान के पास पंहुचा तो उसने भगवान से कहा |

रामेश्वरम : हे प्रभु मैंने जिंदगी भर आपकी सेवा की आपकी सच्चे मन से प्रार्थना की अपना सारा जीवन आपको समर्पित कर दिया, लेकिन फिर आप ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया क्यों आप मुझे बचाने नहीं आये, क्यों आपने अपने भक्त को मरने के लिए छोड़ दिया |

भगवान : रामेश्वरम मैंने हमेशा तुम्हारी मदत की है, में तुम्हारी जान बचाने एक बार नहीं बल्कि कई बार आया था | लेकिन तुम मुझे पहचान ही नहीं पाए | पहले तो में एक औरत के रूप में तुम्हारे पास आया था | उसके बाद गांववाले के रूप में, फिर नाविक के रूप में और आखिरी बार एक सैनिक के रूप में | मैंने हर बार तुम्हे समझाया और बचाने की कोशिश की थी लेकिन तुम नहीं माने |

रामेश्वरम : क्षमा कीजिये प्रभु लेकिन वो सारे लोग तो मनुष्य थे |

भगवान : में कभी किसी की मदत करने स्वयम नहीं आता बल्कि इस जरिया भेजता हु | में महाभारत का युद्ध एक क्षन में समाप्त कर सकता था यदि में हतियार उठा लेता लेकिन यह मेरा कर्म नहीं था | मेरा कर्म है सिर्फ रास्ता दिखाना जो मैंने तुम्हे एक बार नहीं कही बार दिखाया था |

रामेश्वरम : मुझे माफ कीजिये प्रभु में आपको समझ नहीं पाया |

तो दोस्तों हमें इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है की हमें हर वक्त भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए | बल्कि उनके द्वारा दिए गए कृतियों को समझ लेना चाहिए जो हमें अन्य किसी रूप में दिखाई देते है |

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