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मेहनती और कामचोर दोस्त की कहानी : Hindi Stories

जोधपुर गांव में विनायक और तुषार नाम के दो दोस्त रहते थे | विनायक बहुत ही आलसी और कामचोर था और तुषार बहुत ही मेहनती था | तुषार अपना काम पूरी लगन से करता था | वह दोनों ही गांव के जमींदार नारायण दास के पास काम करते थे | तुषार काम करता था और विनायक अपने बैल को बांधकर पेड़ के निचे गमछा बिछाकर सो जाता था और जैसे ही शाम हो जाती विनायक अपने शरीर पर मिटटी लगाकर और बैल को भी मिटटी लगाकर ले जाता था |

वह जमींदार को दिखता था की उसने बहुत काम किया है | और तुषार खेतो का काम ख़त्म होने के बाद अपने बैल को अच्छे से नहलाकर और खुद भी नहाके साफ सुथरा होकर, घर वापस जाता था |

जमींदार विनायक के इस झूट को पकड़ नहीं पाता था | वह सोचता था की विनायक बहुत ही मेहनती है और तुषार बहुत ही कामचोर है | इसलिए जमींदार ने अपने खाना बनाने वाले से कहा “विनायक बहुत ही मेहनत करता है, उसकी अच्छी देखभाल करना और ध्यान रखना उसके खाने पिने में कोही कमी नहीं होनी चाहिए” | रसोइयाँ विनायक को भरपेट खाना देता था और तुषार को कम खाना देता था इसलिए उसका पेट नहीं भर रहा था |

तुषार ने मन ही मन सोचा जो काम करता है उसे ही भूका रहना पड़ता है, और जो कामचोर है उसे भरपेट खाना मिलता हैं यह कैसा न्याय है | विनायक यह बात समझ गया की तुषार के मन में संदेह हो रहा है | और वह डर गया की तुषार ने असली सच बता दिया तो यह मेरे लिए अच्छा नहीं होगा |

उस रात विनायक ने तुषार से कहा “खेत की कोही भी बात जमींदार बाबू से नहीं कहना वरना यह तुम्हारे लिय अच्छा नहीं होगा” | तुषार डर जाता है और कहता है | अच्छा ठीक है नहीं बताऊंगा पर याद रखना सच को कभी छुपा नहीं रहता एक न एक दिन सबके सामने उसे आना ही पड़ता है |

यह कहकर तुषार सो जाता है | पुरे दिन की थकान के कारण तुषार गहरी नींद में सो जाता है | और विनायक पुरे दिन सोने के कारण पूरी रात को सो नहीं पाता है | इसलिए जब सुबह बैल लेकर विनायक खेत में गया तो उसकी आँखे लाल देखकर जमींदार ने पूछा “क्या बात है विनायक रात को नींद नहीं आयी क्या”

तब विनायक ने कहा “अब क्या कहु जमींदार साहब मच्छर के वजह से मुझे रात में नींद नहीं आयी” | विनायक की खातिरदारी और बढ़ गयी अब वो जमींदार के घर में रहने लगा विनायक बहुत खुश हुवा और वह मजे में रहने लगा | खेतो में जाकर बैलो को रस्सी से बांधकर वह पुरे दिन सोया रहता था | और तुषार ईमानदारी से अपना काम करता जाता बिना फल की चिंता किए |

एक दिन यह हुवा की खाते वक्त रसोईयो ने देखा की विनायक खाना बरबाद कर रहा है | रसोईयो ने विनायक से कहा “में कुछ दिनों से देख रहा है की तुम खाना बरबाद कर रहे हो, तुम्हे जितना चाहिए सिर्फ उतना ही लो” | विनायक ने कोही जवाब नहीं दिया | तुषार को देखकर रसोईया ने सोचा विनायक खाने को बरबाद कर रहा है और तुषार का पेट ही नहीं भर रहा है, कुछ तो बात जरूर है |

रसोईया जमींदार के पत्नी के पास गया और उनसे कहा “प्रणाम मालकिन में यह कहा रहा था की कुछ तो गड़बड़ हो रहे है” | रसोईया ने जमींदार के पत्नी को विनायक और तुषार की सारी बात बताई | उस रात जमींदार के पत्नी ने जमींदार से कहा “सुनिये विनायक और तुषार खेतो में क्या काम करते है वो आपको एक बार देखना चाहिए, आपको नजर रखनी चाहिए” | जमींदार ने कारन जानना चाहा तो जमींदार के पत्नी ने कारण बताया | पत्नी की बाते सुनकर जमींदार ने सोचा बात सो सही है, लेकिन एक बार अपनी आँखो से देखना होगा |

दूसरे दिन वह सुबह बिना किसी को कुछ कहे चुपचाप खेतो में चला गया | दूर से खड़े होकर जमींदार ने देखा तुषार बहुत मेहनत और लगन से काम कर रहा है | अब जमींदार विनायक को देखने की लिए गया | पुरे खेत में उन्हें विनायक कही नजर नहीं आया | तभी जमींदार की नजर तालाब के तरफ पड़ती है | जमींदार ने देखा विनायक पेड़ के निचे सो रहा था | विनायक को सोता देखकर जमींदार को बहुत गुस्सा आया | किसी को कुछ कहे बिना वह अपने घर वापस आ गया |

घर आकर उसने अपने पत्नी से कहा की “मैंने तुषार के साथ बहुत अन्याय किया तुषार बिना कुछ कहे मेहनत कर रहा है और दूसरा बिना काम किये सारे सुख सुविधा भोग रहा है में तुषार को पहचान नहीं पाया” | जमींदार के पत्नी ने कहा “हम तुषार को दूसरा काम दे देते है और हमारी बेटी की शादी उससे करावा देते है हमारी बेटी भी हमारे आखो के रहेगी” |  पत्नी की बाते सुनकर जमींदार को बहुत अच्छा लगा | जमींदार ने शाम होने का इंतजार किया और जब वह दोनो वापस आ गए तब जमींदार ने विनायक से कहा

जमींदार : विनायक अभी मरे कमरे में आयो, तुमसे कुछ बात करनी है |

विनायक : शरीर पर मिटटी लगी है, पुरे दिन काम करके में मिटटी को साफ़ करके आता हु |

जमींदार : नहीं-नहीं अभी मेरे कमरे में आओ मुझे तुमसे जरुरी बात करनी है | 

जमींदार यह कहकर चला जाता है | विनायक को कुछ भी समझ नहीं आता है की अचानक जमींदार को क्या हुवा |  विनायक जमींदार के कमरे में गया |

जमींदार : आ गए विनायक अभी तुम्हरा एक काम बाकि है | तुम तुषार को अच्छे से नहला कर साफ़ कपडे पहना कर इस कमरे में लेकर आवो |

विनायक : जमींदार साहब यह कैसा न्याय है में पुरे दिन मेहनत करने के  बाद उस आलसी तुषार की सेवा करू ?

जमींदार : तुमने मुझे बहुत दिनों से बेवकूफ बनाया है, आज मैंने तुम्हे अपने आखो से पेड़ के निचे सोता हुवा देखा है | तुम आलसी हो, कामचोर हो तुम इसी समय इस घर से निकल जाओ |  तुम्हे अब में काम पर नहीं रखना चाहता |

यह बात सुनकर तुषार ने जमींदार के पैर पकड़ कर कहा

तुषार : जमींदार साहब मेरे कहने पर विनायक को एक मौका दीजिये मुझे विश्वास है की विनायक को अपनी गलती का एहसास हो गया है |

जमींदार : ठीक है बस एक बार मौका देता हु अपने आप को सुधार लो तुम्हे साबित करना पड़ेगा की तुम मेहनती हो |

उसके बाद तुषार जमींदार के हिसाब किताब का काम देखने लगा और विनायक ने खुद को बदल कर बहुत मेहनती हो गया | वह समझ गया की कामचोरी करने के बाद जीवन में कोही सफल नहीं होता है | विनायक और तुषार की दोस्ती और गहरी हो गयी |

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