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मेहनती किसान और परियो की कहानी | राजा की कहानी

बहुत समय पहले की बात है | एक गांव तरह-तरह के आम के बगीचों के लिय बहुत प्रसिद्ध था | उस गांव में हर प्रकार का आम मिल जाता था | और साल के बारह महीने वहा आम उपलब्ध थे | इसलिए गांव का नाम भी आमपुर था | आमपुर राजा सूर्यदेव के सिमा के अंदर आता था और आमपुर की वजह से राजा सूर्यदेव की दूर-दूर तक चर्चा होती थी | बहुत से देश राजा सूर्यदेव के पास आम लेने के लिए आया करते थे | आमपुर के किसानो का सूर्यदेव बहुत ख़याल रखा करते थे |

उन्होंने उन किसानो की सुविधा के लिए आमपुर में हर तरह की व्यवस्था की थी | इसलिए आमपुर के किसान भी आम के बगीचे में दिन रात मेहनत किया करते थे | आम के बगीचे राजा के बगीचे थे इसलिए बगीचों को लोहे के बड़े बड़े तारो से घेर दिया था | ताकि कोही जानवर, चोर आम के बगीचों में फसल को बरबाद न करे |

सबकुछ अच्छा चल रहा था | एक बार गर्मियों के मौसम में रात के समय जब आसमान पर झिलमिल करते तारे झिलमिला रहे थे और पूर्णिमा का चाँद अपनी रोहणी बिखेर रहा था | तो परियो के महल का दरवाजे खुला और रंगबिरंगी परिया आकाश में भ्रमण करने के लिए निकल पड़ी | उड़ते उड़ते जब वह आमपुर के पास पहुंची तो वह आमो की महक से आकर्षित हो उठी और आमपुर के बगीचों में उतर गयी | बगीचे में लगे पेड़ो से लदे आमो को देखकर वे बहुत खुश हुई और उन्होंने बगीचों में से आम तोड़कर खाना शुरू कर दिया |

देखते ही देखते बगीचे के सारे आम ख़तम हो गए और परिया संतुष्ट होकर वापस परी लोक चली गयी | अगले दिन आमपुर में कोहराम मच गया | व्यापारी अपने गाड़ियों के लेकर बगीचों के पास खड़े थे | किंतु बगीचों में एक भी आम नहीं था |

राजा को जैसे ही इस बात की सूचना मिली वह तुरंत आमपुर पंहुचा और उसने किसानो से कहा “किसानो मैने तुम्हे खुश रखने के लिए इस गांव में हर सुविधा का मुफ्त इंतजाम किया है ताकि हर चिंता से मुक्त होकर तुम आम के बगीचों की रक्षा करो और बढ़िया से बढ़िया आम उगाने में मदत करो, फिर भी सबके होते हुय बगीचे के सारे आम चोरी हो गए, ऐसा कैसे हो गया इस बार तो में तुम्हे छोड़ देता हु लेकिन अगली पूर्णिमा को मुझे सारे आम चाहिए वर्णा तुम में से एक भी किसान ज़िन्दा नहीं बचेगा” | ऐसा कहके सूर्यदेव गुस्से और दुःख से पीड़ित होकर वापस अपने नगर को चला गया और व्यापारी भी आमपुर के किसानो की निंदा कर चले गए |

किसान बड़े हैरान थे की कल तक बगीचा आम से भरा हुवा था फिर ऐसा कैसे हो सकता है की एक ही रात में सारे आम गायब हो जाते है | राजा की घोषणा से वे सभी डर गए थे और सोच रहे थे की अगले पूर्णिमा तक बगीचा आम से कैसे भर पायेगा | सभी यही सोच रहे थे तभी सरपंच का बेटा सुधाकर दौड़ता हुवा आया और बोला “पिताजी देखिये मुझे बगीचे से क्या मिला” | सब उसकी तरफ देखने लगे उसके हात में एक जादुई छड़ी थी | जो शायद किसी परी के हात से छूटकर गिर गयी थी |

छड़ी से निकलता अद्भुत प्रकाश देखकर सरपंच को यह समझ में आ गया की यह छड़ी किसी इंसान की नहीं बल्कि किसी देव या परी की है | इसलिए उन्होंने उस छड़ी को गांव के बाहर आदर सहित रख दिया और गाववालो से बोला “हमारे बगीचे पर किसी अलोकिक शक्ति ने हमला किया है, इसलिए ये सारा बगीचा आमो से खाली हो गया है | और यह छड़ी भी उन्ही लोगो की होगी, जिसे लेने वे लोग जरूर वापस आएंगे इसलिए हम इस छड़ी को यहाँ रखकर छुप कर खड़े रहेंगे और देखेंगे की ये छड़ी आखिर किसकी है” |

गाववालो ने सरपंच की बात मानी और छड़ी के पास ही पेड़ो के पीछे छुप गए | कुछ समय बाद रात बहुत गहरी हो गयी | छड़ी से अद्भुत प्रकाश निकल रहा था | लेकिन उसे लेने के लिए अबतक कोही भी नहीं आया था | फिर अचानक आकाश की तरफ जुगनू की तरह रोहणी दिखाई दी जो धीरे धीरे बड़े होते जा रही थी |

देखते ही देखते वह आमपुर में छड़ी के पास पहुंच गए | यह देखकर गांववाले पूरी तरह से हैरान हो गए | परियो का झुंड उस आम के बगीचे में छड़ी के पास आ गया | तब परियो की रानी बोली “बाहर आओ सरपंच मुझे पता है की तुम सब यही पर छुपे हुए हो, मेरी छड़ी लौटने के लिए में तुम्हे धन्यवाद कहती हु” | यह सुनकर सरपंच सारे गाववालो के साथ परी रानी के पास आया और बोला “मैं आपसे एक प्रश्न पूछना चाहता हु, क्या हमारे बगीचे के आम आप लोगो ने खाये है ” परी बोली “तो अच्छा इस अद्भुत फल का नाम आम है”, हमें माफ़ कीजिये पर, हा सरपंच हमने ही कल यह आम खाये थे, अगर आप चाहे तो हम आपको उसका मूल्य दे सकते है, बताइये आमो के बदले आप को क्या चाइये |

सरपंच बोला “यह सारे बगीचे के आम हमारे नहीं है बल्कि राजा सूयदेव के है”, जिन्हे वे दूसरे देशो में बेचते है और कल बगीचे में आम न मिलने के कारन उन्होंने हम किसानो को यह आदेश सुनाया है की यदि अगले पूर्णिमा तक सारे आम ना मिल गए तो वह हम सबको मृत्युदंड देंगे |

सरपंच की बात सुनकर परी बड़ी उदास हो गयी और बोली “सरपंच हमारे कारण आप को बड़ा ही दुःख हुवा किंतु आप परेशांन न हो हम आपके परेशानी को दूर करेंगे, हम इस पूर्णिमा से लेकर अगले पूर्णिमा तक परी लोक के जादुई पानी से आप के आम के बगीचे को सिचेंगे जिसके कारन आप के बगीचे में अगले पूर्णिमा तक नए फल आ जायेंगे, आज से ही हम यह कार्य शुरू करते है, और बिना आपके अनुमति के आम खाकर हमने जो पाप किये है, उसका प्रायचित्त करेंगे” |

उस दिन से रात को सेकडो परिया आती, सब के सरो पर परी लोक के जल का मटका रहता और परी लोक का जादुई जल वे पेड़ो को डालती थी | देखते ही देखते पूरा बगीचा छोटे-छोटे आमो से भर गया और पूर्णिमा तक बगीचों में आम के फल लग गए |

परी ने सरपंच से कहा आपको डरने की कोही जरुरत नही है | बगीचे में आम फिर से आ गए है तब सरपंच ने परी को धन्यवाद कहा | सारी परिया परीलोक वापस चली गयी | सरपंच राजा के आने का इंतजाम करने लगा | अगले दिन राजा व्यापारी के साथ आया और बगीचे को फिर से आमो से भरा देखकर बड़ा हैरान हुवा | और सोचने लगा की मुझे तो पता ही नहीं था की आम के फलो को एक महीने में भी उगाया जाता है, अब में हर महीने आम उगाकर राज्य के खजाने को भर सकता हु | उसने तुरंत ही सरपंच को बुलाया और कहा “सरपंच तुम्हारी वजह से मुझे आजतक बहुत घाटा हुवा है, अगली पूर्णिमा को मुझे बगीचे में फिर से आम चाहिए” ऐसा कहकर वह चला गया |

सरपंच परेशांन होकर सोचने लगा की एक महीने में आम कैसे उगाये जाय और में परियो से कैसे सहायता मांग सकता हु | पर मेरे पास दूसरा कोही विकल्प नहीं है | सरपंच गांव के बाहर खड़ा होकर परियो को पुकारने लगा | आखिर उसकी पुकार परी तक पहुंची और परी उससे पूछा “क्या बात है सरपंच क्या हुवा “सरपंच ने परी को राजा की सारी बाते बताई |

परी राजा के पास गयी और सारी घटना विस्तार से बताई और कहा “राजन आप के किसान बड़े ही मेहनती और आप के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने वाले है किंतु आप के बगीचे के आम जो इस महीने आप को मिले वह आम जादुई पानी से उगाये गए है |  इसलिए वह एक महीने में ही तैयार हो गए, आशा है आप समझ गए होंगे की प्राकृतिक रूप में ऐसा होना संभव नहीं है | इसलिए किसानो पर दया कीजिये और जिस प्रकार आप के बगीचे में आम हुवा करते थे उसी प्रकार आम को होने दे और अपने राज्य के खजाने को बढ़ाते रहिये, में वचन देती हु की आज के बाद आमपुर के बगीचे में कभी कोही चोरी नहीं होगी और यह हमेशा फलता फूलता रहेगा”

राजा ने परी की बात मान ली और किसानो से अपना दिया हुवा आदेश वापस ले लिया | सब लोग खुश हो गए और हसी ख़ुशी रहने लगे |

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