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मेहनत का फल मीठा होता है | Hindi Moral Story

किशनपुर नामक एक गावं में बिरजू और आत्माराम नाम के दो पडोसी रहते थे | बिरजू बहोत आलसी था और कोई काम नहीं करता था | आत्माराम के पास बहुत गाय थी, जिनका दूध बेचकर वह पैसा कमाता था | इसी दौरान दूध का धंधा काफी बढ़ रह था | तो आत्माराम ने सोचा की वह पड़ोस के गांव में भी दूध बेचना शुरू करेगा | अपने जमा किये हुए पैसो से उसने नयी मोटरसाईकल खरीदी | जिससे वह बाकी के गांव में जाकर दूध बेचने लगा |

एक दिन जब आत्माराम काम के लिए अपनी मोटरसाईकल पर निकला तब बिरजू ने उसको देखा, फिर सोचा ‘अरे मुझे बिना बताये आत्माराम ने नयी मोटरसाईकल को खरीद लिया, उसके लौटने के बाद पूछूंगा’ ऐसा सोचकर बिरजू ने आत्माराम के घर के बाहर बैठकर उसके लौटने का इंतजार करता रहा | कुछ समय बाद आत्माराम दूध बेचकर वापस घर के तरफ लौट आया |

तब बिरजू ने कहा

बिरजू : आत्माराम, तुमने नयी मोटरसाईकल ख़रीदली ?

आत्माराम : हां बिरजू, क्यू क्या हुआ ?

बिरजू : अरे कुछ नहीं, बस यही जानना चाहता था की नयी मोटरसाईकल के लिए पैसा कहा से आया तुम्हारे पास ?

आत्माराम : मैंने आज तक जितना भी दूध बेचा उसमे से थोड़ा-थोड़ा इस मोटरसाईकल के लिए जमाया | इसकी मदद से अब में पासवाले गांव में भी दूध बेचने लगा हु |

बिरजू : अच्छा, तू तो काफी समझदार निकला आत्माराम |

बिरजू हसते हुए आत्माराम के लिए खुश होने का नाटक किया और फिर अपने घर चला गया | घर जाकर बिरजू सोच में पढ़ गया की इतने कम समय में आत्माराम ने नयी मोटरसाईकल खरीद कैसे ली? बिरजू ने तो खुद कुछ नहीं लिया था | उदास होकर बिरजू गहरी सोच में ही डूबा रहा | 

फिर उसने सोचा ‘में क्यू इतना उदास रहु, अगर में भी आत्माराम के तरह कुछ काम करू तो पैसा कमाकर में भी अपनी मनपसंद चीजे खरीद सकता हु | पर में क्या करू? अरे हा मुझे तो मिठाई बनाना बहोत अच्छी तरह से आता है, हां में एक मिठाई की दुकान शुरू करूँगा यह सोचकर अगले दिन बिरजू ने अपनी एक छोटी सी दुकान खोली और गरम-गरम मिठाई बेचने लगा | इस प्रकार बिरजू ने बहोत स्वादिष्ट मिठाई कम भाव में बेचने लगा | उसके गरमा-गरम मिठाई की सुगंध गांव के कोने-कोने तक पहुँच गयी |

गांव के सारे लोग बिरजू की दुकान पर मजेदार मिठाई का स्वाद लेने के लिए आने लगे | कुछ ही दिनों में बिरजू की मिठाई बहुत मशहूर हो गयी | एक दिन रमेश नामक एक आदमी उसके दुकान पर मिठाई खा रहा था | रमेश ने बिरजू से कहा “वा… वा… बिरजू तुम्हारे हातो की मिठाई बहुत ही मजेदार है, इतनी कमाल की मिठाई मैंने आजतक खायी ही नहीं, अरे वा … | ऐसा कहकर रमेश मिठाई का मजा ले रहा था और बाकि के लोगो ने भी उसकी बहुत तारीफ की, पुरे गांव में बिरजू की दुकान और भी मशहूर हो गयी |

अब धीरे-धीरे बिरजू थोड़ा घमंडी बनने लगा | और कहने लगा “मेरी जैसी मिठाई तो और कोही बना ही नहीं सकता, मुझे मिठाई का दाम भी बढ़ाना पड़ेगा, और मुझे ज्यादा मुजफा भी होगा | दुकान पर आये हुए सब लोगो को बिरजू ने बोला की आज से मिठाई का दाम दुगना कर रहा हु” | एक आदमी मिठाई खरीदने आया था उसने कहा “अरे भाई मिठाई इतनी महँगी कब से हो गयी है, बाकी के दुकानों में तो ईतनी महँगी मिठाई नहीं मिलती है” |

बिरजू ने उस आदमी से कहा “अगर मेरे जैसी स्वादिष्ट मिठाई कही और मिले तो वही जाकर लीजिये मुझे कोही फर्क नहीं पड़ता है | बिरजू की दुकान पर मिलने वाली मिठाई बहुत स्वादिष्ट थी इसलिए लोगो ने महँगी मिठाई खरीदना शुरू कर दिया | वनोद सोचने लगा की मेरे जैसी मिठाई बनाने वाला इस गांव में दूसरा कोही नहीं है और गांववालों को तो अब मेरे स्वाद की लत लग गयी है | ऐसा सोचकर उसने मिठाई को तोलने वाले तराजू के निचे सबकी नजर से चोरी एक छोटा सा भार लगा दिया | जिससे वो लोगो को ज्यादा पैसो में काम मिठाई बेच सके | इस तरह से बिरजू का कारोबार उसके तरीके से चलता रहा |

एक दिन गांव के जमींदार को वनोद के मिठाई के बारे में पता चला | तो उसने अपने नौकरो को उसके पास एक किलो मिठाई लाने के लिए भेजा | नौकर गए और बिरजू की दुकान से एक किलो मिठाई लेकर आये और जमींदार को दे दिया | जमींदार ने देखा मिठाई तो एक किलो से काम है |

उसने अपने नौकरो से कहा “मैंने तो एक किलो लाने के लिए कहा था, लेकिन ये एक किलो से कम है, मेरे आदेश का पालन क्यों नहीं किया” | जमींदार ने गुस्से से कहा तब नौकरो ने कहा हमने तो दुकानदार को एक किलो मिठाई देने को ही बोला था, फिर उसने इतना ही दिया, हमारी कोही गलती नहीं है |

फिर जमींदार नौकरो के साथ बिरजू की दुकान पर आ रहा था | तब एक भिकारी बिरजू की दुकान पर जा रहा था उसे देखकर जमींदार और उसके नौकर वही रुक गए, और वो देखना चाहते थे की दुकानदार उसे किस तरह मिठाई बेचेगा |

जमींदार और उसके नौकर पास वाले दुकान के पास रुक कर नजारा देखने लगे | उस भिकारी ने कहा “एक मिठाई कितने की है भाई” बिरजू ने कहा “एक मिठाई आठ रूपए की है” | भिकारी के पास सिर्फ तीन रूपए थे उसने वो निकला और बोला “मुझे सिर्फ एक मिठाई दे दो” | बिरजू ने कहा “आठ रुपये की एक मिठाई है दो रूपए की नहीं” | यह सुनकर वो भिकारी वहा से जाने ही वाला था तभी वनोद ने उसे रोककर कहा “रुको तुमने यहाँ रुककर मेरे मिठाई का सुगंध लिया है, उसके लिए वो तीन रुपये मुझे दो ” | भिकारी ने कहा “मेरे पास सिर्फ यह तीन रुपये ही है और तुम इसे भी लेना चाहते हो, में नहीं दूंगा” |

उसी वक्त जमींदार वहा पहुंचा और अपने पास रखा हुवा पैसो का थैला भिकारी को दिया और कहा “तुम्हारे दो रुपये के बदले इस दुकानदार को यह पैसे का थैला दे दो” | भिकारी ने कहा “आप तो बड़े लोग हो जमींदार साहब, आपको तो न्याय करना चाहिए, अगर आप इस मिठाई वाले को पैसे देंगे तो क्या होगा” | जमींदार ने कहा मेरी बात मानो और उसे पैसे दे दो” | भिकारी ने जमींदार की बात मानकर बिरजू को पैसे का थैला देने ही वाला था तब जमींदार ने कहा “रुको इस थैले को जोर से हिलाओ” भिकारी ने जब थैले को हिलाया तब उसमे रखे सिक्के बजने लगे |

जमींदार ने बिरजू से कहा पैसो की आवाज सुनाई दी क्या बिरजू” | फिर बिरजू कहा “हा जमींदार साहब” | अगर ये बात है तो इस भिकारी ने तुम्हारे मिठाई के सुगंध का भुगदान कर दिया” | वनोद ने जमींदार से कहा “इसने तो पैसे दिए ही नहीं और आप कह रहे है की भुगदान कर दिया” | पैसे की आवाज जैसे तुमने सुनी उस तरह भिकारी ने भी तुम्हारे मिठाई की सुगंध सुंग ली थी, अब हिसाब बराबर हो गया” | वनोद को तुरंत अपने गलती का एहसास हुवा, और उसने जमींदार से माफ़ी मांगी” | जमींदार ने कहा तुमने केवल यही गलती नहीं की है “तुम्हारे मिठाई का दाम बाकि दुकानों से ज्यादा है, और तुम गलत तरीके से तोलकर ज्यादा पैसो में काम मिठाई बेचते हो” |

बिरजू ने जमींदार से कहा “मुझे मेरे गलती के लिए सिर्फ एक बार माफ़ कर दीजिये, मैं ऐसा दोबारा नहीं करूँगा” | जमींदार ने कहा “तुमने आजतक बहुत गलतिया की है, तुम्हे तो इस गरीब को एक मिठाई देने का भी मन नहीं किया, अब में तुम्हे कहता हु की अभी इस मिठाई के दुकान को बंद करो ” | जमींदार की बाते सुनकर बिरजू बहुत डर गया, और चिंता में डूब गया |

वह जमींदार से गिड़गिड़ाकर माफ़ी मांग रहा था तब उसी रास्ते से आत्माराम जा रहा था | बिरजू को परेशान देखकर उसके दुकान पर आया और बोला “जमींदार जी में आपसे माफ़ी मांगता हु, कृपया आप बिरजू को इस बार माफ़ कर दीजिये” |

आत्माराम का अच्छा स्वाभाव को जानकर जमींदार ने बिरजू से कहा “इस बार तो में तुम्हे आत्माराम की बात सुनकर माफ़ करता हु, लेकिन याद रहे ये तुम्हारी पहली और आखरी गलती थी इसके बाद में तुम्हे माफ़ नहीं करूँगा, अब मेहनत और ईमानदारी से अपना काम करो” |

जमींदार ऐसा कहकर वहा से चला जाता है | आत्माराम ने भी बिरजू से कहा की वो ऐसी गलती दुबारा ना करे | बिरजू ने दुबारा अपना काम ईमानदारी से करना शुरू किया और आत्माराम की तरह नाम कमाना चाहा | उसने मिठाई के दाम भी कम कर दिए अब और भी लोग उसके दुकान पर आने लगे |

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