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राजा और भिकारी हिंदी कहानी | Hindi Stories

रामपुर नगर में एक राजा अपने राजकुमार के साथ अपने राज्य में घूमने के लिए निकला | राजा हमेशा राज्य में लोगो का हाल-चाल पूछने जाया करता था | पर इसबार वह राजकुमार को भी साथ लेकर जाता है, क्योंकी राजकुमार को राज्य के लोगो से मिला सके | अपने यात्रा की शुरवात वह लोग मंदिर से करते है | जब राजा और राजकुमार मंदिर की सीढिया चढ़ रहे थे | तब राजकुमार की नजर मंदिर के सीढ़ियों पर बैठे एक भिकारी पर जाती है | माथे पर चंदन और गेरुआ रंग का कपड़ा धारण करकर, हात में कमंडल लिए हुए ब्राह्मण की तरह लग रहा था |

राजकुमार उसके पास गया और उस भिकारी से पूछा “क्या आप कोही ब्राह्मण है, तब उस भिकारी ने कहा “हा राजकुमार में एक बहुत गरीब ब्राह्मण हु, अपने घर का पालन पोषण करने के लिए मंदिर के सीढ़ियों पर बैठकर भिक मांगता हु, और जो पैसे आते है उनसे अपने परिवार का पालन पोषण करता हु” |

ब्रामण की यह बात सुनकर राजकुमार को उस ब्राह्मण पर बहुत दया आती है | राजकुमार ने अपने सोने से भरी पैसे की थैली उस ब्राह्मण को दान में देता है | राजकुमार ने ब्राह्मण से कहा “लीजिये अब आपको दुबारा यहाँ नहीं बैठना पड़ेगा” |

जब ब्राह्मण ने वो थैली खोलकर देखि तो वह बहुत खुश हुवा और राजा और राजकुमार को धन्यवाद कहकर अपने घर की तरफ निकल पड़ा | रास्ते में वह ब्राह्मण सोचते हुए जा रहा था ‘जल्दी से जाकर यह सोने के सिक्के अपने पत्नी को दिखाउँगा’, वह कितनी खुश हो जाएगी, अब हमारी गरीबी ख़तम हो जाएगी, अब मुझे भिक नहीं मांगनी पड़ेगी, ख़ुशी-ख़ुशी हमारा जीवन बितेगा, हमारे राजकुमार बहुत बड़े दिल वाले है’ | ब्राह्मण यह सब सोच ही रहा था तब वहा एक लुटेरा आया और ब्राह्मण के हात से थैली छीनकर भाग गया |

ब्राह्मण ने सोने से भरी थैली बचाने की बहुत कोशिश की पर वो चोर थैली लेकर वहा से भाग गया |  ब्राह्मण बहुत निराष हो गया, उसकी ख़ुशी कुछ ही पल में ख़त्म हो गयी | घर आकर उसने अपने पत्नी को सारी बाते बताई | यह सुनकर पत्नी भी बहुत दुःखी हो गई और बोली “आप दुःखी ना हो शायद वो हमारे लिए नहीं था, इसलिए हमें नहीं मिल पाया” | दुःखी होकर ब्राह्मण खाना खाकर सो गया |

अगले दिन फिर सुबह मंदिर में जाकर भिक मांगने लगा | राजकुमार राजा के साथ आज भी घूमने को निकला था | मंदिर आकर उस ब्राह्मण को वही देखा | राकुमार ने कहा “आप आज फिर यहाँ क्यों आ गए कल ही तो मैंने आपको इतना सारा धन दान में दिया था” | ब्राह्मण बड़े दुःख के साथ राजकुमार को कल की पूरी कहानी सुनाता है | 

राजकुमार को ब्राह्मण की बाते सुनकर बहुत दुःख हुवा फिर राजकुमार अपने थैली में से बहुत ही किमती ‘माणिक’ पत्थर निकालता है और वो माणिक ब्राह्मण को देते हुए कहता है “ये लीजिये ये बहुत ही क़ीमती पत्थर है, यह आपके बहुत काम आ सकता है | ब्राह्मण उस पत्थर को पाकर बहुत खुश हो गया और राजकुमार से कहा “आपका फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद, राजकुमार आप इंसान नहीं देवता है देवता, चलिए अब में चलता हु” | राजकुमार भी मुस्कुराते हुवा अपने रास्ते चला जाता है | 

ब्राह्मण घर जाकर उस माणिक को पानी के खाली मटके में रख देता है और ख़ुशी-ख़ुशी सो जाता है | उसकी पत्नी नदी से पानी भरने जाती है, अचानक रास्ते में किसी बड़े पत्थर से टकराने की वजह से उसके सर पर रखा पानी का मटका निचे गिरकर टूट जाता है |

वो बोलती है “हे भगवान अब फिर से घर जाकर नया मटका लाना पड़ेगा पानी भरने के लिए” | अब वो घर की तरफ निकलती है और पानी भरने के लिए वही मटका उठाकर ले आती है जिसमे माणिक था | नदी के पास जाकर ब्राह्मण की पत्नी मटके को पानी में डुबाती है तो माणिक पानी में गिर जाता है | ब्राह्मण की पत्नी बोली “अरे ये क्या गिरा, लगता है कोही बड़ा सा कंकड़ था जो गिर गया होगा” | ऐसा सोचकर वह मटके में पानी भरकर घर ले आती है | जब वो पानी भरकर घर आ गई तब ब्राह्मण भी जग चूका था |

उसने अपने पत्नी को सारी बाते बताई | ब्राह्मण की पत्नी बहुत खुश हुई और बोली “कहा है वो माणिक पत्थर, जरा मुझे भी दिखाओ | उसे तो मैंने पानी के खाली मटके में छुपा कर रखा है, रुको अभी लाता हु” | ब्राह्मण की पत्नी घबराते हुए कहती है “हे भगवान उस मटके मैंने पानी भरकर लाया है” | फिर ब्राह्मण की पत्नी ने ब्राह्मण को सारी बाते बताई | अब वे दोनों बहुत ही दुखी हो जाते है | इसी अफसोस के साथ ब्राह्मण सो जाता है |

अगले दिन फिर सुबह ब्राह्मण निराश मन से मंदिर के सीढ़ियों पर बैठा भिक मांग रहा था | तभी राजा और राजकुमार फिर उस मंदिर में आए | अब राजकुमार की नजर फिर उस भिकारी पर पड़ी | राजकुमार ने कहा “अरे ब्राह्मण अब फिर से यहाँ” ब्राह्मण ने कहा “जी राजकुमार” | ब्राह्मण ने कल घटी सारी बात राजकुमार को बताई | राजकुमार फिर से दुःखी हो गए | राजकुमार ने अपने पिता से पूछा “पिताजी ऐसा इनके साथ बार-बार क्यों हो रहा है” | तब राजा ने कहा अभी इनका सही समय नहीं आया है, इसलिए इनसे सब कुछ छिन लिया जा रहा है जब इनका सही समय आयेगा तब इनके पास सब कुछ वापस लौट आएगा |

अब राजा ने ब्राह्मण के हात में दो पैसे रख दिए | ब्राह्मण दो पैसे हात में देखकर सोच रहा था ‘इससे तो मेरा कुछ भी नहीं हो पायेगा” | वह ऐसा सोच ही रहा था तभी उसकी नजर एक मछुवारे पर पड़ी जो एक मछली को जाल से निकालकर बाहर फेक रहा था |

वो मछली पानी के बाहर आकर तड़प रही थी | ब्राह्मण को उस मछली पर दया आ गई उसने सोचा ‘इन पैसो से में अपने परिवार का पेट तो नहीं भर सकता लेकिन इस मछली की जान तो बचा सकता हु | अब वह जल्दी से मछवारे के पास पंहुचा और उसे दो पैसे देकर उस मछली को खरीदकर उस पानी से भरे कमंडल में छोड़ देता है |

पानी में जाकर वह मछली फिर से होश में आती है, और कमंडल में ही उछलने लगी | यह देख ब्राह्मण बहुत खुश हुवा, की उसने मछली को बचा लिया, तब उस मछली के मुँह से वही माणिक पत्थर बाहर आता है, जो राजकुमार ने ब्राह्मण को दिया था | पत्थर को देखकर ब्राह्मण के ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और वह ख़ुशी से उछलता हुवा बोला “मिल गया, मिल गया” |

उसकी ये बात वहा पास ही बैठे उस चोर को सुनाई दी जिसने ब्राह्मण की सोने से भरी थैली चुराकर ले गया था | वो डर गया और अपने आप से कहने लगा “हे भगवान लगता है इस ब्राह्मण ने मुझे देख लिया, अगर इसने मेरी शिकायत राजा से कर दी तो मुझे मृत्युंदंड की सजा भी मिल सकती है, मुझे ब्राह्मण से माफ़ी मांगकर उसे उसका धन लौटा देना चाहिए” |

यह सोचते हुए चोर ब्राह्मण के पास आता है और माफ़ी मांगकर चुराया हुवा धन लौटा देता है | ब्राह्मण चोर से कहता है “अगर तुम चाहते हो की में तुम्हारी शिकायत राजा से ना करू तो तुम्हे सारे गलत काम छोड़ने होंगे, और मेहनत कर के कमाना होगा” | चोर कहता है ठीक है में अभी सारे गलत काम छोड़ देता हु” | चोर ख़ुशी ख़ुशी वहा से चला जाता है |

अगले दिन ब्राह्मण फिर से मंदिर के सीढ़ियों पर बैठ जाता है | जब राजा और राजकुमार वहा आते है तब ब्राम्हण जल्दी से खड़ा होकर राजकुमार के पास जाता है | ब्राह्मण राजकुमार को सारी कहानी बता देता है | राजकुमार बहुत खुश होता है और अपने पिताजी से कहते है “पिताजी कितनी ख़ुशी की बात है ना ब्राह्मण के साथ सब ठीक हो गया” |

तब राजा राजकुमार से कहता है “हा बेटा देखा तुमने जबतक ब्रामण ने अपने बारे में सोचा तबतक उसे कुछ नहीं मिला, लेकिन जैसे ही उसने दूसरे के बारे में सोचा तब अपने आप सब ठीक हो गया, दूसरे की मदत करने वाले की मदत हमेशा भगवान करते है |

सिख: हमें हमेशा दुसरो की मदत करनी चाहिए, दुसरो की मदत करने वाले की मदत भगवान करते है |

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