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लकड़हारे की कहानी | Lakadhare Ki Kahani in Hindi

एक समय की बात है | गांव से दूर जंगल में एक लकड़हारा रहता था जिसका नाम था गोपाल | वह एक छोटे से घर में रहता था और मेहनत से काम किया करता था फिर भी वह गरीब था | एक दिन वह लकड़ी काटने के लिए जंगल में गया | एक अच्छे पेड़ के खोज में वह काफी जंगल के अंदर गया | जब उसे पेड़ मिल गया वह काम करने लगा |

कुछ समय बाद लकड़हारे के हात से कुल्हाड़ी हात से फिसल कर नदी में गिर गयी | बेचारा गोपाल यह देखकर रोने लगा | और कहने लगा “मेरे पास केवल वही कुल्हाड़ी थी जिसकी मदत से में गुजारा करता था लेकिन अब वो भी खो गयी अब में अपनी रोजी रोटी कैसे कमाऊ” | गोपाल उदास बैठा था और अचानक से उसे कुछ सुनाई दिया | देखने पर उस नदी में से एक देवी माँ प्रकट हुयी |

देवी ने कहा “में इस नदी की देवी हु “विश्राम करते समय कोही कुल्हाड़ी मेरे पास गिरी, कहा से गिरी यह देखने के लिए ऊपर तक आयी तो तुम्हे रोते हुए देखा, क्या हुवा मुझे बताओ”

गोपाल ने अपने आसु पोछे और कहा “देवी माँ जो कुल्हाड़ी गिरी थी वह मेरी ही है | में एक गरीब आदमी हु लकड़ी काटकर पैसे कमाता हु, मेरी कुल्हाड़ी फिसल कर नदी में गिर गयी और अब मेरे पास रोजी रोटी कमाने का कोही साधन नहीं है, अगर आप मेरी कुल्हाड़ी मुझे वापस कर दे तो आपका आभारी रहूँगा | |

देवी तुरंत नदी के भीतर चली गयी और लेकर आयी एक सुनहरी कुल्हाड़ी | देवी ने गोपाल को कुल्हाड़ी दी परंतु गोपाल ने कहा की वो उसकी कुल्हाड़ी नहीं है | देवी फिर से नदी के अंदर गयी और इस बार चांदी की कुल्हाड़ी लेकर आ गयी | गोपाल ने फिर से मना कर दिया और बोला की यह भी उसकी नहीं है |

देवी ने देखा की यह लकड़हारा बहुत ही ईमानदार है | वह फिर से नदी के अंदर चली गयी और इस बार देवी गोपाल के कुल्हाड़ी को लेकर आ गयी | जब गोपाल ने अपने कुल्हाड़ी को देखा वह ख़ुशी से झूम उठा | उसने देवी माँ का बहुत-बहुत धन्यवाद कहा | गोपाल की सत्यता देखकर देवी माँ ने गोपाल को सोने और चांदी की दोनों कुल्हाड़ी को उसे दे दिया |

लकड़हारा तीनो कुल्हाड़ी को ख़ुशी से अपने साथ घर ले गया | इसलिए याद रखना जो भी करो ईमानदारी से करो |

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