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लालची पत्नी की कहानी : Moral Stories | Hindi Kahaniya Web

सोमपुर गांव में कमलाकर नाम का एक कपड़ो का व्यापारी रहता था | उस गांव में सिर्फ उस अकेली की ही दुकान थी | गांव के सारे लोग उसी से कपडे ख़रीदा करते थे | शादी हो या त्यौहार सब लोग उसी से कपडे ख़रीदा करते थे | कमलाकर दूसरे गांव से भी कपडे लाकर बेचता था, जिससे उसे बहुत लाभ होता था | फिर कुछ दिन बाद कमलाकर ने शादी कर ली | अपने पत्नी से वो बहुत प्यार करता था | जो भी वह माँगा करती थी कमलाकर उसे लाया करता था |

एक दिन कमलाकर ने अपने पत्नी के लिए सोने के झुमके ख़रीदे | घर आकर उसने अपने पत्नी से कहा “सुलोचना देखो में तुम्हारे लिए क्या लाया हु”

सुलोचना: अरे… वा, सोने के झुमके ये कितने खूबसूरत है | में बहुत दिनों से ऐसे ही झुमके चाहती थी, आप को कैसे पता चल जाता है, की मुझे क्या चाहिए |

कमलाकर: इन झुमको को देखकर मुझे लगा की यह झुमके तुमपर बहुत अच्छे लगेंगे, और मुझे काम में मुनाफा हुवा था, तो में इन्हे लेकर आया |

सुलोचना वो सोने के झुमके तुरंत पहन लेती है | फिर दूसरे महीने उसने अपने पति से सोने के कंगन की मांग की, कमलाकर अपने पत्नी से बहुत प्यार करता था | इसलिए वह सुलोचना को मना नहीं कर पाया और उसे सोने के कंगन खरीद कर दे दिए | एक दिन सुलोचना अपने पड़ोस में रहने वाली मोहिनी के पास जाती है और कहती है “देखा मोहिनी तुमने शादी होते ही, मेरे पति ने मेरे लिए सोने के झुमके और चुडिया खरीदी है” तब मोहिनी ने कहा “यह तो बहुत अच्छी बात है, ये दिखने में भी बहुत खूबसूरत है”

सुलोचना: खूबसूरत तो होंगे ही, शादी को दो साल हो गए है, क्या तुम्हारे पति ने तुम्हारे लिए कुछ नहीं ख़रीदा |

मोहिनी : तुम तो जानती हो ना सुलोचना की मेरे पति कितना कमाते है, उनकी कमाई में हमारा घर गुजरना भी बहुत मुश्किल से होता है तो वह, यह सारे सोने और गहने कैसे लेकर देंगे, और में उनसे मांग भी तो नहीं सकती, वैसे भी जो भी हमारे पास है, में उसी में बहुत खुश हु |

सुलोचना : हां… कुछ कर भी तो नहीं सकते, अच्छा ठीक है, में चलती हु, |

सुलोचना ने ये कभी नहीं सोचा की उसका पति कितनी मेहनत करके पैसे कमाता है | जो उसे चाहिए होता था वो अपने पति से तुरंत कहती और मंगवा लिया करती थी |

एक दिन उसने अपने पति से कहा “सुनिए कुछ दिन पहले  हम लोग मनिषा के शादी में गए थे, आपने देखा उसने कितना खूबसूरत हार पहना हुवा था, मुझे भी वैसा ही हार चाहिए, वैसा हार मुझपे बहुत खूबसूरत लगेगा” | पत्नी सुलोचना की बाते सुनकर कमलाकर को ये बात पता चल गयी की चाहे कुछ भी कर लो, लेकिन इसका मन नहीं भरेगा, सुलोचना लोगो में खुद की तारीफ सुनना चाहती थी | वह अपने आप पर गर्व महसूस करना चाहती थी और यह बात कमलाकर को बुल्कुल अच्छी नहीं लगी | वो बहुत मेहनत करके के बाद पैसा कमाता था | लेकिन उसे यह समझ आ गया की अगर ऐसा ही चलता रहा, तो उसकी सारी मेहनत की कमाई उसकी पत्नी खर्च करावा देगी | बाद में कमलाकर सिर्फ जरुरत की चीजे ही खरीदता था |

इसी तरह कुछ महीने गुजर गए | एक दिन सुलोचना के घर उसकी पड़ोसन मोहिनी आयी |

मोहिनी : सुलोचना कैसी हो ? तुमने तो हमारे घर आना ही बंद कर दिया |

सुलोचना : में तो ठीक हु, तुमने जो पहने हुए है, वो सारे गहने क्या सोने के है ?

मोहिनी : हा सुलोचना, मेरे पति ने नया काम शुरू किया है, और उनको मुनाफा भी अच्छा हो रहा है, हमने नया घर भी ख़रीदा है और उसी के गृह प्रवेश के लिए, तुम्हे बुलाने आयी हु |

सुलोचना : क्या नया घर भी खरीद लिया यह, तो बहुत अच्छी बात है, हम जरूर आएंगे |

मोहिनी को देखने के बाद सुलोचना को उसका पहना सोना, और उसके गहने ही याद आ रहे थे | कमलाकर के घर आते ही कहने लगी

सुलोचना : वो जी सुनते हो, आज हमारे घर मोहिनी आयी थी | उसके घर के गृह प्रवेश के लिए बुला रही थी, मैंने कहा हम जरूर आएंगे, लेकिन तब तक आप मरे लिए मोती का हार जरूर खरीदना, ठीक है |

सुलोचना की बातें सुनकर कमलाकर परेशान हो गया था क्यों की मोतियों का हार खरीदने के लिए पैसे उसके पास नहीं थे | लेकिन सुलोचना हर दिन उसी के बारे में झगड़ते रहती थी | कमलाकर मजबूर जो गया और उसे मोतियों का हार खरीद का दे देता है | फिर सुलोचना के पास जितना गहना था वो सारे पहनकर अपनी पड़ोसन मोहिनी के घर जाती है |

मोहिनी : तुम आ गयी सुलोचना तुम्हे देखकर अच्छा लगा |

सुलोचना : हां हां कैसे नहीं आती, तुम्हारा घर भी तो मुझे देखना था, अरे ये क्या इतना छोटा घर ख़रीदा है तुमने, इसमें तो ज्यादा कमरे भी नहीं है, अच्छा तो है, लेकिन ज्यादा शानदार नही |

मोहिनी : जीतनी हमारी हैसियत है, उतने में ही हमने घर बनाया था | छोटा है तो क्या हुवा, अपना है यही हमारे लिए काफी है, अच्छा मेरा छोड़ो तुम अपना बतावो, तुम तो कहती थी, की तुम्हारा पति हमेशा तुम्हारे लिए सोने के गहने खरीदता रहता है, तो आज तुम यह नकली मोतियों का हार पहनकर क्यों आयी हो, दो दिन पहले मैंने तुम्हारे पति को ये मोतियों का हार खरीदते हुए बाजार देखा था | सिर्फ यही नकली है या सारे गहने ही नकली है |

यह सारी बाते सुनकर सुलोचना कुछ नहीं कह पायी, और चुप हो गयी | जल्दी से अपने पति को बुलाया और घर के लिए निकल गए | घर आने के बाद वह रोने लगी, अपने पत्नी को रोता देखकर कमलाकर को बात पता चल गयी और वह घर से बाहर चला गया | दूसरे दिन सुलोचना अपने पति से कहती है |

सुलोचना : आप के वजह से में शर्मिंदा जो गयी, आप ने मुझे धोका दिया था अगर आप मोतियों का हार खरीद नहीं सकते थे तो मुझसे कह देते, लेकिन नकली हार देने की क्या जरुरत थी |

कमलाकर : मैंने कहा था की में मोतियों का हार खरीद नहीं सकता, लेकिन तुमने मेरी बात ही नहीं सुनी, बार-बार एक ही बात कहकर मुझे परेशांन करने लगी इसलिए मैंने नकली हार खरीद कर लाकर दिया था | अब तो कुछ सीखो ज्यादा लालच करने से ऐसे ही होता है, तुम्हारे पास बहुत सोना है, लेकिन तुम फिर भी खुश नहीं रहती, जो देखा वो मांग लेती हो, कुछ समझती ही नहीं, अपने सहेलीको देखो, कितना पैसा बचत करती है, उन्होंने तो नया घर भी ख़रीदा है, और तुम मेरा सारा पैसा सिर्फ अपने गहने पर ही खर्च करवाती हो |

पति की बाते सुनकर सुलोचना समझ गयी थी की वह कितनी बड़ी भूल कर रही थी | उसके बाद उसने कमलाकर से कुछ नहीं माँगा, वो बदल गयी थी | यह बदला हुवा बरताव अपने पत्नी में देखकर कमलाकर को बहुत ख़ुशी मिली, मन लगाकर उसने काम करना शुरू किया और कुछ दिनों में कमलाकर ने भी एक अच्छा सा घर खरीद लिया और अपने पत्नी के लिए असली मोतियों की माला भी खरीदी |

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