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लालच बुरी बला है | हिंदी कहानिया | Hindi Stories

रामेश्वर नाम का एक छोटा सा गांव था जिसमे बिरजू नाम का किसान रहता था | उस किसान के दो बेटे थे एक बेटे का नाम सुधाकर और दूसरे बेटे का नाम गिरिधर था | सुधाकर बहुत होशियार था | लेकिन गिरिधर उतना ही भोला भाला था | बिरजू कुछ दिनों से बहुत बीमार था | उसने सोचा की सारी संपत्ति उन दोनों बेटे के नाम कर दू |

फिर उसने अपने बड़े बेटे को बुलाया और कहने लगा “देखो बेटा सुधाकर मुझे लगता है की में बहुत ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रहूँगा, मैंने अपने पूरी जिंदगी की जो कमाई यह घर और जमींन है, तुम बहुत होशियार हो लेकिन तुम्हारा छोटा भाई बहुत ही भोला है तुम उसको कही जाने मत देना हमेशा उसे अपने पास ही रखना और उसका ध्यान रखना, यह दौलत दोनों मिल कर आपस में बाट लेना |

कुछ दिन बितने के बाद बिरजू बीमारी के वजह से गुजर जाता है | सुधाकर उतना अच्छा इंसान भी नहीं था, जितना बिरजू समझता था | सुधाकर ने सोचा की उसका छोटा भाई गिरिधर बहुत ही भोला है में कुछ भी कर लूंगा तो उसे पता नहीं चलेगा |

एक दिन उसने गिरिधर से कहा “देखो गिरिधर पिताजी ने हमें जो संपत्ति दी है, ये घर और हमारा खेत है, में यह घर ले लूंगा और तुम्हारे लिए खेत में एक घर बनाऊंगा, वैसे भी इस पुराने घर में तुम नहीं रह पावोगे, खेत भी हम दोनों आधा-आधा बाट लेंगे, पानी की तरफ का हिस्सा में ले लूंगा और दूसरा वाला तुम्हे दूंगा, और हमारी जो गाय है उसका अगला वाला भाग तुम ले लेना और पिछला वाला भाग में ले लेता हु, अब आखिर में बचा हमारा आम का पेड़ उसके निचे वाला भाग तुम लेलो और ऊपर वाला भाग में ले लूंगा, तुम पेड़ के ठंडी-ठंडी छाया का मजा लेना” | तब गिरिधर बोला क्या भैया सारी मेहनत आप ही करेंगे आप कितने अच्छे हो |

इस तरह दोनों भाइयो में बटवारा हो जाता है | गांव में जो घर था वह सुधाकर ने ले लिया और गांव के बाहर जो उनका खेत था और वहा गिरिधर को घर बनवा कर दिया | जहा पानी बहता है वह हिस्सा खुद ले लेता है और जहा बंजर हिस्सा होता है वह छोटे भाई को दे देता हैं | लेकिन गिरिधर अपने भोलेपन की वजह से सारि बाते समझ नहीं पाया | हर दिन गिरिधर गाय को घास खिलाता और उसकी देखभाल करता था | सुधाकर गाय का गोबर खेतो में उपयोग करता था ताकि उसकी फसल अच्छी उगे | बड़े भाई को गोबर उठता देख गिरिधर को बहुत दुःख होता था |

गिरिधर ने सुधाकर से एक दिन कहा “भाई आप कितनी मेहनत करते हो, में तो सिर्फ इसको खाना खिलाता हु लेकिन आप उसकी सारी सफाई करते है, आप का इतना काम करना मुझसे देखा नहीं जाता, एक काम करते है गाय का अगला हिस्सा आप लेलो और पीछे वाला हिस्सा में लेता हु | तब सुधाकर कहता है नहीं-नहीं मेरे भाई, इसकी कोही जरुरत नहीं, यह सब मेहनत तुम्हे करने की जरुरत नहीं, में सब देख लूंगा” | गिरिधर हर दिन आम के पेड़ को पानी डालता था और उस पेड़ के छाया के निचे आराम करता था |

एक दिन गिरिधर सुधाकर से कहता है “अरे भैया कितनी देर धुप में काम करते रहोगे थोड़ी देर के लिए इस पेड़ के निचे आकर विश्राम कीजिये” | तब सुधाकर कहता है नहीं उस पेड़ की छाया सिर्फ तुम्हारी है | गिरिधर को लगता है की उसका बडा भाई उसे काम करते हुए देख नहीं सकता इसलिए वह खुद कर रहा है |

इसी तरह कुछ दिन गुजरने के बाद सुधाकर ने शादी कर ली | सुधाकर की पत्नी उसकी तरह लालची थी | फिर गिरिधर ने भी एक दिन एक अच्छी लड़की से शादी कर ली | गिरिधर की पत्नी बहुत समझदार और होशियार थी | गिरिधर के बड़े भाई ने उसके साथ बुरा किया है यह बात उसको पता थी |

फिर एक दिन उस गाय ने बच्चा दिया यह देखकर गिरिधर बहुत ही खुश हुवा और कहने लगा की इस बछड़े की देखभाल में करूँगा तब सुधाकर उसे कहता नहीं यह बछड़ा मेरा है तुम्हे देखभाल करने की कोही जरुरत नहीं” | यह सुनकर गिरिधर को बहुत दुःख होता है | 

सुधाकर हर दिन गाय का दूध ले लिया करता था | गिरिधर की पत्नी सुधाकर का किया सारा धोका पहचान लेती है और बहुत ही ज्यादा दुखी हो जाती है |

एक दिन वह गिरिधर से कहती है “आप बहुत ही भोले है’ इसी भोलेपन का फायदा आपका बड़ा भाई उठा रहा है, गाय को चारा आप खिलाते है और दूध आपका बड़ा भाई लेता है | तब वह अपने पत्नी से कहता है “में कर भी क्या सकता हु भैया ने मुझे अगले वाला भाग ही दिया था, और गाय के बच्चे को मुझे छूने भी नहीं दिया | तब उसकी पत्नी कहैत है “आप वैसा ही कीजिये जैसा में कहती हु” |

रोज की तरह सुधाकर गाय का दूध निकालने के लिए आता है तब गिरिधर गाय के अगले हिस्से पर लकड़ी से मार मारता है | तब वह गाय दूध निकालने के लिए आये सुधाकर को जोर से लाथ मारती है और सुधाकर गिर जाता है | तब सुधाकर गिरिधर से कहता है “क्या हुवा गिरिधर क्या कर रहे हो, उस गाय को क्यों मार रहे हो” तब गिरिधर कहता है “कुछ नहीं भैया में तो मच्छरों को भगा रहा हु” |

सुधाकर फिर से दूध निकलने के लिए बैठता है और गिरिधर फिर से गाय के पैर पर लाठी से मारता है और सुधाकर गिर जाता है | कुछ देर तक ऐसा की करने के बाद सुधाकर को समझ आ गया और अपने छोटे भाई से कहने लगा कल से में भी गाय को चारा खिलाऊंगा और दोनों मिलकर दूध को बाट लेंगे” |

अपने बड़े भाई को बदलता हुवा देख गिरिधर बहुत खुश हो गया | इसी तरह कुछ दिन और गुजर गए आम के पेड़ को फल लगने लगे फिर सुधाकर उन फलो को तोड़ना शुरू करता है | यह देखकर गिरिधर कहता है की “मुझे भी आम” चाहिए तब सुधाकर कहता है की आम के ऊपर का हिस्सा मेरा है | बड़े भाई सुधाकर का बरताव गिरिधर अपने पत्नी को बताता है | गिरिधर की बाते सुनकर उसकी पत्नी कहती है आप दु:खी मत होना “जैसा में कहूँगी आप वैसा ही कीजिये” |

दूसरे दिन सुबह को रोज की तरह सुधाकर पेड़ पर चढ़कर आम तोड़ने तब लगा गिरिधर ने पेड़ के निचे के हिस्से को चिपचिपी चीज लगाकर चला गया | और जब गिरिधर पेड़ से निचे उतरने लगा तो वह निचे गिर गया | तब सुधाकर गिरिधर से कहता है “ये क्या था गिरिधर जो तुमने पेड़ पर लगाया है” | गिरिधर कहता है की वह एक दवा है जिसे पेड़ पर लगाने के बाद बहुत आम आएंगे” ऐसा मुझे किसी ने बताया है” | अब गिरिधर सीढ़ी की मदत से पेड़ पर चढाने लगता है यह देखर गिरिधर और उसकी पत्नी ने मिलकर एक नई तरकीब निकाली |

रोज की तरह सुधाकर ने आम तोड़ना शुरू कर दिया | गिरिधर दो आदमियोंको लेकर वहा पहुँचता है और उनसे कहता है की वह उस पेड़ को काट दे | यह देखकर सुधाकर कहता है “यह क्या है गिरिधर ये सामान और चाकू क्यों यहा इसका क्या काम है” | तब वह कहता है की इस पेड़ को अगर हम काटेंगे तो उसकी जगह एक नया पेड़ उगेगा जो ज्यादा फल देगा इसलिए इस पेड़ को काटना है | सुधाकर समझ जाता है और कहता है “रुको अगर तुम्हे भी आम चाइये तो हम दोने आपस में बाट लेते है” | इस तरह दोनों आम के फलो को आपस में बाट लेते है |

गिरिधर के भोलेपन की वजह से उसका बढ़ा भाई बहुत गलत फायदा उठाता था | लेकिन गिरिधर की पत्नी की होशियारी और समझदारी से उसे और ज्यादा धोका न दे सका | सुधाकर अपने छोटे भाई को धोका देकर बहुत शर्मिंदा हुवा था | फिर उसने अपने गलती का एहसास हुवा और उसने अपने छोटे भाई से गलती की माफ़ी भी मांगी |

तो हमने क्या सीखा कभी भी किसी को धोका नहीं देना चाहिए क्योकि बाद में हमें भी नुकसान हो सकता है |

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