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शेरनी का घमंड: Kids Stories, Hindi Stories, Hindi Kahaniya

बहुत साल पहले की बात है | एक जंगल में एक शेरनी रहती थी | शेरनी दिखने में बहुत ही सुंदर और ताकतवर थी | शेरनी को अपने ताकत पर बहुत घमंड था | शेरनी का पति शेर जंगल का राजा था | शेर बहुत ही दयालु और न्यायप्रिय था | एक बार सुवर और लोमड़ी की लढाई हो गयी | तभी शेर वहा पहुँचता है, और कहता है “रुक जाओ लढना बंद करो, क्यों लढ रहे हो, क्या इस जंगल में तुम लोगो ने सिर्फ लढना झगड़ना ही सीखा है” | तब लोमड़ी कहती है “नहीं महाराज हमें माफ़ कर दिजिए”, सुवर भी कहता है “हमसे गलती हो गयी” |

सारे जानवर शेर का बहुत आदर करते थे | लेकिन शेरनी बहुत ही घमंडी थी | वह जंगल के किसी भी जानवर से सीधे मुँह बात भी नहीं करती थी | शेरनी के दो बच्चे थे | शेरनी के बच्चो का बाकि के जानवरो से खेलने का बहुत मन करता था | लेकिन शेरनी उन्हें किसी के साथ खेलने नहीं देती थी | एक दिन शेरनी के बच्चे दुसरे जानवरो के साथ खेलने के लिए जाते है | बच्चो को दूसरे जानवरो के साथ खेलता देखकर शेरनी कहती है “बच्चो इधर आवो तुम्हे इनके साथ खेलने के लिए कितनी बार मना किया है, ये सब तुच्छ प्राणी है, हमारा इनसे कोही मुकाबला नहीं हो सकता है” | शेरनी की बाते सुनकर कछुवा कहता है “शेरनी उनके बच्चो को हमारे साथ खेलने क्यों नहीं देती है” | तब बंदर कहता है “हम उनके बराबर के नहीं है और वह हमें बहुत तुच्छ प्राणी समझती है |

एक दिन शेरनी अपने बच्चो के साथ खाना खा रही थी | तभी झाड़ियों में से एक साप शेरनी के बच्चे की तरफ काटने को बढ़ता है | इससे पहले वह साप शेरनी के बच्चे को काटने की कोशिश करता वहा एक चील पहुँचती है और साप को मार देती है |

शेर का बच्चा उस चील को धन्यवाद कहता है | चील शेर के बच्चे से कहता है “कोही बात नहीं यह तो मेरा कर्तव्य था” | शेरनी बच्चो से कहती है “अब चलो बच्चो अब चलने का वक्त हो गया है” | शेरनी ने चील को धन्यवाद् भी नहीं कहा और वहा से चली गयी | तब वहा खरगोश आता और चील से कहता है “शेरनी ने ये ठीक नहीं किया उसने तुम्हे धन्यवाद तक नहीं कहा, जिस समय उन्हें हमारी जरुरत होगी हम उसकी मदत नहीं करेंगे” |

एक दिन शेरनी अपने बच्चो के साथ झील के किनारे सैर करने गयी और वहा उसकी आँख लग गयी | शेरनी को सोता देखकर उसके बच्चे खेलने के लिए निकल गए | अब शेरनी की नींद खुली तो उसने देखा की उसके दोनों बच्चे उसके पास नहीं है | वो कहती है “ये क्या मेरे बच्चे कहा चले गए” | शेरनी ने बच्चो को झील के आस पास देखा लेकिन वहा उसे नहीं मिले, क्योंकी उस समय शेर भी जंगल में नहीं था | शेरनी बहुत परेशान हो गयी | और सोचने लगी “अब में क्या करू “महाराज भी जंगल में नहीं है, अब में अपने बच्चो को कहा और कैसे खोजू | शाम होने वाली थी शेरनी की चिंता और बढ़ गयी |

शेरनी बच्चो की ढूंढते हुए बंदरो के पास पहुंची | शेरनी को पहली बार परेशांन देखकर बंदर बोला “आज शेरनी बहुत ही परेशांन दिख रही है” | शेरनी बंदरो से

कहती है “अरे सुनो बंदर क्या तुमने मेरे बच्चो को देखा है” | बंदर को यकींन ही नहीं होता की शेरनी उन से बात कर रही है | बंदर कहने लगा “शेरनी क्या आप हम से बाते कर रही है” | शेरनी कहती है “हा में तुमसे ही बात कर रही हु” |

बंदर कहता है “हमें कुछ भी कैसे पता होगा हम तो तुच्छ प्राणी है” | बंदरो का जवाब सुनकर शेरनी उदास और परेशांन हो जाती है | शेरनी वह से आगे निकल पड़ती है | शेरनी कुछ आगे जाने के बाद उसे गधा दिखाई देता है वह गधे से पूछती है “सुनो क्या मेरे बच्चे तुम्हारे साथ खेलने आये थे, क्या तुमने उन्हें देखा है” | तब गधा कहता है “नहीं शेरनी रानी वह मेरे साथ खेलने कैसे आएंगे, आप ने उन्हें मुझ जैसो के साथ खेलने से मना किया है” | गधे की बाते सुनकर शेरनी को खुदपर अफसोस होता है |

वह बच्चो को ढूंढती हुयी, और आगे बढ़ती है | उसे रस्ते में आगे हाती और भालू मिलते है | शेरनी की हाती के साथ बिलकुल भी नहीं बनती थी | पर बात उसके बच्चो की थी इसलिए वह हाती से कहती है “सुनिए हातीजी क्या तुमने मेरे बच्चो को कही देखा है” | हाती कहता है नहीं “शेरनी मैंने तुम्हारे बच्चो को कही नहीं देखा है, अगर देखा भी होता तो में तुम्हे नहीं बताता, क्योकि तुमने तुम्हारे बच्चो को मुझसे मिलने को मना किया था, और उनसे ये भी कहा था की में एक पागल हाती हु” |

शेरनी को हाती का जवाब सुनकर बहुत बुरा लगता है और वह भालू से पूछती है “भालू भाई क्या तुमने मेरे बच्चो को कही देखा है” | भालू कहता है “नहीं शेरनी रानी मैंने आपके बच्चो को कही नहीं देखा है” | शेरनी फिर से भालू से कहती है “क्या तुम मेरे बच्चो को ढूंढने में मेरी मदत करोगे” | भालू कहता है “में आपकी मदत कैसे कर सकता हु, में तो एक बेकार और तुच्छ भालू हु, आपके बच्चो को तो मुझसे दूर ही रहना चाहिए” |

कुछ समय बाद वहा जंगल के बाकि जानवर भी वहा आते है | शेरनी सबसे कहती है “क्या आप मेरे बच्चो को ढूंढने में मेरी मदत करोगे” | शेरनी के बाते सुनकर चूहा कहता है “में आपकी मदत कैसे कर सकता हु, में तो एक छोटा सा चूहा हु, उतने में घोडा कहता है “में भी एक पागल और बेलगाम घोडा हु में भी तुम्हारी मदत नहीं कर सकता, वैसे भी हम सब तुच्छ प्राणी है” | सारे जानवर शेरनी की मदत करने से इनकार करते है | यह सब सुनकर शेरनी रोने लगती है | उसे पता चल जाता है की वह कितनी घमंडी है | वह सब जानवरो से कहती है, “सारी गलती मेरी है, मैंने तुम सब के साथ बहुत बुरा बरताव किया है, मझे माफ़ कर दो मुझे अपने गलती का एहसास हो गया है, मैने यह नहीं समझा की एक दोस्त का होना कितना जरुरी है, अब कोही भी मेरी मदत नहीं करेगा” |

शेरनी को रोता देखकर सभी जानवरो को बहुत दुःख होता है, तब मुर्गा कहता है “चिंता मत करो शेरनी रानी हम, आपके बच्चो को ढूंढने में आपकी मदत करेंगे” | तब हाती कहता है “हम सब तुम्हे यह महसूस करना चाहते थे, की हमें तुम्हारे व्यवहार से कितना दुःख पहुँचता है” | शेरनी सबसे अपने गलती की माफ़ी मांगती है | तभी सारे जानवर एकजुट होकर शेरनी के बच्चो  ढूंढना शुरू कर देते है, कुछ समय बाद घोड़े को शेरनी के बच्चे कछुओं के साथ खेलते हुए दिखाई देते है और वह शेरनी को आवाज देकर बुला लेता है | शेरनी भागते हुए वहा पहुँचती है | वह बच्चो को कछुओं के साथ खेलता हुवा देखकर बहुत खुश होती है | वह सभी जानवरो को धन्यवाद् कहती है | उस दिन से शेरनी किसी भी जानवर का अपमान नहीं करती है और अपना घमंड हमेशा के लिए त्याग देती है |

सिख: हमें कभी भी किसी चीज का घमंड नहीं करना चाहिए और किसी के भी स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुचानी चाहिए |

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