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सच छुपता नहीं छुपाने से हिंदी कहानियाँ: Sach Chupta Nahi Chupane Se

नामपुर गांव में समाधान नाम के एक लड़का रहता था | समाधान के परिवार में उसके पापा, मम्मी और ददिमा थी | एक दिन समाधान अपने घर में बैठकर अपने दादी से बाते करता है की

समाधान : पापा इतना गुस्सा क्यों करते है |

दादी: अरे नहीं वह तुमसे बहुत प्यार करता है |

समाधान : आप तो उनका ही पक्ष लेंगी ही क्यों की वह आपका बेटा जो है |

दादी : तुम्हारी माँ भी तो कुछ होने पर तुम्हारा पक्ष लेती है ना |

दोने बाते करते हुए हँसने लगे यह सुनकर समाधान की माँ आती है और कहती है |

समाधान की माँ : क्या बात है आज दादी और पोता दोनों बड़े खुश लग रहे है | क्या बाते हो रही है जो इतने जोर-जोर से है रहे है |

दादी : यह बात तो तूम हम दोनों के बिच में ही रहने दो | तुम माँ बेटे अपनी बाते करो

समाधान की माँ : यह अच्छी बात है |

यह सुनकर सब हसने लगते है | तभी वहा अचानक समाधान के पापा भी आ जाते है | और पूछते है |

समाधान के पापा : अरे ऐसा क्या हो गया की तुम लोग इतने जोर से है रहे हो जरा मुझे भी बताओ |

समाधान की माँ : कुछ नहीं जी हम लोग ऐसे ही समाधान के बातो पर है रहे है |

समाधान के पापा : तुम लोग यहा बैठकर हसी मजाक ही करते रहना अब चलो जाकर पढ़ाई करो |

समाधान : लेकिन पापा

समाधान: कोही लेकिन वेकिन नहीं जाओ पढ़ाई करो | परीक्षा नजदीक आ रहे है पढ़ाई पर ध्यान दो |

समाधान वहा से उठकर अपने कमरे में चला जाता है और पढ़ाई करने लग जाता है | इस तरह कुछ दिन बीत जाते है | समाधान की परीक्षा भी ख़त्म हो जाती है | एक दिन समाधान सुबह जल्दी तैयार होकर समय से पहले ही पाठशाला पहुंच जाता है | जहा पाठशाला के बरामदे में उसके दोस्त विकास और नितिन गप्पे लड़ा रहे होते है | समाधान भी उनके साथ जाकर बैठ जाता है और कहता है |

समाधान : क्या दोस्तों आज की योजना तैयार है ?

विकास : हां समाधान तैयार है | आज हम अपना काम करके रहेंगे |

समाधान : किसी तरह की कोही गलती तो नहीं होगी ?

नितिन : गलती हो ही नहीं सकती हमने हमने अच्छे से योजना बनाइ है |

समाधान : ठीक है आज ही करते है |

इतने में पाठशाला की घंटी बजती है और सब लोग अपने कक्षा में चले जाते है | जिसके बाद तीनो चुप-चाप बैठकर पढ़ाई करने लग जाते है | कुछ समय बाद कक्षा खतम होने के बाद जब सब बच्चे कक्षा से बाहर निकल रहे होते है तब समाधान और उसके दोस्त कक्षा के बच्चे को अपने पास रोक लेते है |

समाधान : अरे प्रथमेश सुनो जरा हमें तुमसे कुछ बाते करनी है |

प्रथमेश : क्या काम है तुम्हे मुजसे ?

विकास : हम लोग तुमसे दोस्ती करना चाहते है | जिसके लिए हम तुम्हारे पसंद के लड्डू भी लेकर आये है |

प्रथमेश : अगर ऐसा है तो में तुम्हारे साथ दोस्ती करने के लिए तैयार हु |

चारो एक दूसरे से हात मिलाते है और लड्डू खाते हुए पाठशाला के दरवाजे की तरफ निकल पड़ते है | जहा एक बड़ी गाडी खड़ी होती है |

प्रथमेश: चलो दोस्तों आप में जाता हु कल फिर मिलेंगे |

यह कहकर प्रथमेश गाड़ी में जाकर बैठ जाता है और वहा से चला जाता है | प्रथमेश के चले जाने के बाद तीनो दोस्त हँसने लगते है |

विकास : लगता है यह योजना जरूर काम करेगी |

समाधान : अब प्रथमेश को समझ में आएगा की हमसे दुश्मनी करने का क्या परिणाम होता है |

जिसके बाद वह सभी अपने-अपने घर लौट जाते है |

इधर प्रथमेश बीमार पड़ जाता है | और कहता है

प्रथमेश: मुझे जमाल गोटा खिला कर वो लोग बहुत खुश हो रहे होंगे लेकिन में चुप नहीं बैठूँगा इसका बदला तो लेकर रहूँगा | 

जिसके बाद प्रथमेश पेट ख़राब होने के कारन घर ही रहता है और समाधान और उसके दोस्तों को  कोसते रहता है | अगले दिन प्रथमेश जैसे ही पाठशाला पहुँचता है तब समाधान और उसके दोस्त उसे पाठशाला के दरवाजे पर खड़े मिलते है | उन्हें देखकर प्रथमेश जल्दी से गाडी से उतरता है और भागते हुए उन सभी के पास जाता है |

प्रथमेश:  तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया | तुम लोगो को मैंने दिल से दोस्त बनाया था |

विकास : हमें किसी का दोस्त नहीं बनना खास कर एक झूठे का तो बिलकुल नहीं |

ऐसा कहकर समाधान और उसके दोस्त कक्षा के तरफ निकल पड़ते है | प्रथमेश भी उनके पीछे-पीछे कक्षा में चला जाता है | सभी शांति से पढ़ाई करते है | छुट्टी की घंटी बजने के बाद जैसे ही सब बच्चे कक्षा के बाहर निकलते है तब प्रथमेश समाधान और उसके दोस्तों का रास्ता रोक लेता है | और कहता है

प्रथमेश : तुम सब को तो पता ही है ना की मेरे पिताजी कौन है फिर भी तुम लोगो ने मरे साथ ऐसा किया |

समाधान : तो क्या अब तुम अपने पुलिस पिताजी से हमारी शिकायत करोगे, ठीक है जाओ कर दो शिकायत हम भी किसी से नहीं डरते है |

विकास : कही सच में शिकायत तो नहीं करेगा ना ये | इसके पिताजी का तो पता नहीं लेकिन मेरे पिताजी मेरी बहुत पिटाई करेंगे |

नितिन : ये क्या  कह रहे हो समाधान अगर इसने अपने पिताजी से शिकायत कर दी तो ?

विकास : हां समाधान सबकी बहुत पिटाई होगी, हमें प्रथमेश से माफ़ी मांगनी चाहिए |

समाधान : लेकिन इसने भी तो मेरे साथ बुरा किया था | तब किसी ने भी इसको माफ़ी मांगने को नहीं कहा |

सबकी बाते सुनकर प्रथमेश बड़ा हैरान हो जाता है | और कहता है |

प्रथमेश : मैंने क्या किया समाधान ?

समाधान : देखो अब ज्यादा नाटक मत करो जैसे तुम्हे कुछ पता ही नहीं है |

प्रथमेश : हां मुझे नहीं पता तुम ही बता दो मैंने क्या किया है |

समाधान : अच्छा तो सुनो, उस दिन जब आधे छुट्टी समय पूरी छुट्टी की घंटी बजी थी | तो तुमने गुरूजी को मेरी शिकायत की थी की यह सब मैंने किया है | सिर्फ तुम्हारे वजह से मुझे उस शरारत की सजा मिली मैंने की ही नहीं थी | किसी ने भी मेरा भरोसा नहीं किया मरे पिताजी ने भी मुझे बहुत डाटा यह सब तुम्हारे वजह से हुवा है |

समाधान की बाते सुनकर प्रथमेश बड़ा ही हैरान हो जाता है और फिर उसका जवाब देता है |

प्रथमेश : समाधान मेरा यकींन करो मैंने यह सब जान बुजके नहीं था |

समाधान : इस बार की परीक्षा में मै पहला आया हु इसलिए तुम मुझसे जलते हो तो में कैसे मान लू की तुमने यह सब जान बुजके नहीं किया है |

प्रथमेश : घंटी बजने के बाद जैसे ही सब बाहर आये तो मैंने घंटी के पास देखा इसलिए मुझे लगा यह सब तुमने किया है और मैंने गुरूजी के पूछने पर तुम्हारा नाम बताया पर उसके बाद मुझे पता चला की वह शरारत तुमने नहीं की थी इसके लिए में तुमसे माफ़ी मांगने भी आया था |  लेकिन तुम मुझसे इतना गुस्सा थे की तुमने मेरी बात ही नहीं सुनी |

समाधान: मुझे अभी भी तुमपे भरोसा नहीं है | तुम बहुत झूठे हो |

प्रथमेश : में सच कह रहा हु, में झूट क्यों बोलूंगा में मनता हु की मुझसे गलती हो गयी है और इसके लिय में तुमसे माफ़ी भी मांगता हु मझे माफ़ कर दो |

प्रथमेश की बाते सुनकर और उसका चेहरा देखकर समाधान को उसपर भरोसा हो जाता है और समाधान उसे माफ़ कर देता है | जिसके बाद वो सभी अच्छे दोस्त बन जाते है और आपसी दुश्मनी को ख़तम कर देते है |

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की कभी भी पूरा सच जाने बिना किसी पर आरोप नहीं लगाना चाहिए |

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