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चींटी और कबूतर की हिंदी कहानी | Hindi Kahaniya Web

एक समय की बात है | पेड़ पर से एक चींटी तालाब में गिर गयी | उस पेड़ पर एक कबूतर था उसने उस चींटी को देखा | उसने उसका जीवन बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश करते हुए देखा | उसने एक पत्ते को तोडा और चींटी के पास फेक दिया | चींटी झट से पत्ते पर चढ़ गयी और बड़ी कृतद्यंता भरी नजरो से उसने कबूतर का धन्यवाद् किया |

वह बहुत थक गयी थी | कुछ सप्ताह गुजर जाने के बाद | एक बहेलिया जंगल में आया | बहेलियोका काम था पक्षियों को पकड़ना उसने कुछ दाने जमींन पर फेके और अपना जाल बिछा दिया | वह चुपचाप किसी पक्षी का जाल में फ़साने का इंतजार करने लगा | कह चींटी जो वही कही से गुजर रही थी |

उसने जब वह सारी तैयारी देखि | उसने देखा की वही कबूतर जिसने उसकी जान बचाई थी उड़कर उसी जाल में फ़सने के लिए धीरे-धीरे निचे उतर रहा था |

चींटी ने एक दम आगे बढ़ते बहेलिए के पैर पर इतने बुरी तरह काट लिया की बहेलिया के मुँह से चीख निकल गयी | कबूतर ने एकदम देखा की शोर किधर से आ रहा है और बहेलिया को देखते ही सबकुछ उसके समझ में आ गया | वह दूसरी दिशा में उड़ गया और उसकी जान बच गयी | चींटी भी अपने काम पर चल गयी |

तभी तो कहते है कर भला सो हो भला |

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