Home » Purani Kahaniya » बदक की कहानी | Duck Story In Hindi

बदक की कहानी | Duck Story In Hindi

बहुत दिनों पहले की बात है | एक तालाब में बहुत खूबसूरत बदक रहती थी | कुछ दिन पहले ही उसने सात अंडे दिए थे | अब अंडो से बच्चे बाहर निकलने का समय हो गया था | माँ बदक बेसबरीसे अंडो का फूटने का इंतजार कर रही थी | कुछ समय बाद उन अंडो से बच्चे बाहर निकलने लगे | यह देखकर बदक बहुत खुश हुयी | अंडो में से छे बच्चे बाहर निकले और माँ बदक के पास आ गए | लेकिन सातवा अंडा अभीतक नहीं फूटा था | वह अंडा बाकी छे अंडो से बिलकुल अलग और बड़ा था |

माँ बदक ने सोचा यह अंडा बहुत बड़ा है इसलिए ज्यादा समय ले रहा है, कोही बात नहीं इंतजार का फल मीठा होता है, जरूर एक खूबसूरत बच्चा इस अंडे में से बाहर आएगा | कुछ दिन बाद सातवा अंडा फूटा माँ बदक और बाकि के बच्चे खुश हुए | लेकिन उनकी ख़ुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी | सातवे अंडे से निकला बच्चा बहुत ही अलग था | जो बाकि के बच्चो से अलग था | माँ बदक नाराज हो गयी |

वह एक माँ थी इसलिए उसने उसे अपने पास ले लिया | लेकिन बाकि के बच्चे उससे दूर रहने लगे | और उससे कहने लगे “तुम हमसे अलग और बदसूरत हो, हमारे पास मत आवो, हमसे दूर ही रहो” | यह सुनकर उसे बहुत दुःख हुवा, वो नाराज हो गया और सोचने लगा “मेरे भाई मुझे अपने साथ नहीं खेलने देते, क्या में इतना बदसूरत हु” | कुछ दिन बित जाते है | सारे बच्चे बड़े हो जाते है |

फिर भी उनकी उस अलग दिखने वाले बदक से नफ़रत काम नहीं होती | एक दिन वह उन बाकि बदक के पास जाता है उसे आता देख एक बदक कहता है “तुम्हे कहा है की हमारे पास मत आवो तुम बहुत ही बदसूरत हो, जावो यहाँ से” | यह सुनकर माँ बदक कहती है बच्चो ऐसा नहीं कहते, वो तुम्हारा भाई है | अलग दिखने वाला बदक रोते हुए माँ बदक के पास आता है और कहता है माँ मरे सब भाई, मुझसे कब प्यार से बात करेंगे |

माँ बदक: कोही बात नहीं बेटे एक दिन जरूर ऐसा आएगा जिस दिन उन्हें उनके गलती का एहसास होगा तभी वहा एक शिकारी आता है |

शिकारी माँ बदक को पकड़ कर ले जाता है | वह अलग देखने वाला बदक उस शिकारी के पीछे माँ-माँ करते हुए जाता है, लेकिन शिकारी वहा से चला जाता है | वह सोचने लगता है “एक माँ ही थी जो मुझसे प्यार करती थी | अब यहा रहकर क्या फायदा मुझे यहाँ से जाना चाहिए | यह सोचकर वह अलग दिखने वाला बदक वहा से चला जाता है | रास्ते में उसे अन्य पक्षी भी नजर आते है, लेकिन वे भी उसे भगा देते है | वह नाराज होकर वहा से चला जाता है |

एक तालाब के किनारे पर जाकर वह अपने आप से कहता है “में कितना बदसूरत हु, शायद इसलिए मुझे कोही अपने पास नहीं आने देता, शायद मेरे नसीब में अकेले रहना ही लिखा है | सर्दी का मौसम शुरू हो जाता है | मौसम से बचने के लिए वह खुद को एक गुफा में छुपा लेता है |

कुछ दिन बित जाते है | वह बड़ा हो जाता है और वो उस गुफा से बाहर निकलने का फैसला कर लेता है | अब वह एक खूबसूरत हंस बन चूका था | लेकिन यह बात उसे मालूम ही नहीं थी | उसने तालाब के किनारे हंसो का झुंड देखा और कहने लगा “कितने खूबसूरत है यह हंस” |

यह देखकर एक हंस उसे कहता है “अरे भाई वहा क्यों खड़े हो यहाँ आवो, हमारे साथ खेलो” | यह सुनकर उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था | वह ख़ुशी से तालाब के किनारे पहुंच जाता है | तालाब के पास पहुंचते ही वह पानी में अपनी छवि देखता है और कहता है “में तो एक हंस की तरह दिखाता हु, इसका मतलब में एक हंस हु” | ख़ुशी-ख़ुशी वह अलग दिखने वाला बदक हंसो के झुंड में शामिल हो जाता है |

सभी हंस उसे ख़ुशी से अपना लेते है | हंसो को आसमान में उड़ते देखकर कुछ बदक कहते है वो देखो कितने खूबसूरत हंस है | आखिर उस अलग दिखने वाले बदक को अपने सुंदरता का एहसास हो ही गया |

तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है “हमें कभी भी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए”

, , , ,

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*