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Hindi Kahaniya: वैद्य की कहानी | Moral Story

पुराने ज़माने में एक गांव में एक वैद्य रहते थे | वह अति उत्तम और दयालु वैद्य थे, और अपने काम में बहुत माहिर थे गांववाले उन्हें बहुत पसंद करते थे | लोगो की मदत करने वजह से हर कोही उनका सन्मान भी करता था |एक बार देर रात को बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी, और वैद्य के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी जब वैद्य ने दरवाजा खोला तो उसने देखा की एक आदमी पूरी तरह बारिश से भीगा हुवा था और ठंण्ड से काप रहा था | वैद्य ने उसे पूछा की आप कौन है और कहा से आ रहे हैं| तब उस आदमी ने कहा

“मेरी मदत कीजिये मेरा घर यहाँ से बहुत हैं और में बहुत बीमार महसूस कर रहा हु, मुझे नहीं लगता हैं की में घर पहुंच पाउँगा कृपया मुझे आज रात यही रहने दे और मेरा इलाज करे, में कल सुबह निकल जाँऊगा ” उसकी बाते सुनकर वैद्य ने उसे घर के अंदर आने के लिए कहा | वह आदमी बहुत आभारी होकर अंदर आ गया | वैद्य ने उसे सर्दी और जुकाम की दवा दी और उसका इलाज किया | दूसरे दिन सुबह उस आदमी ने वैद्य से कहा की में एक सोनार हु ओर तुम्हे किसी भी तरह की मदत चाहिये तो तुम मेरे पास आ सकते हो | सोनार ने वैद्य का शुक्रिया अदा किया और वहा से चला गया |

कुछ दिन बित गए, वैद्य अपने दवा बनाने के लिए और्वेदिक जड़ी बूटी लेने के लिए जंगल गया | रास्ते में उसे बहुत प्यास लगी उसे एक कुँवा दिखा और वहा पानी पिने के लिए रुका | पानी पीते समय उसने मदत की आवाज सुनी जब उसने तोड़ी दूर देखा तो एक विशाल पेड़ जमीन पर गिर गया था | पेड़ के पास से मदत के लिए आवाज आ रही थी, इसलिए वह उस पेड़ की तरफ भागता हुवा गया| पेड़ के निचे एक शेर और साप सभी शाखा और पत्ते के बिच फसे हुए थे | शेर ने उसे कहा “कृपया करके हमें बचा लो मेरा पैर इस पेड़ के निचे फस गया है और में बाहर नहीं निकल पा रहा हु” | साप ने भी कहा “मेरी भी मदत कीजिये में भी पेड़ के निचे फस गया हु ” |

वैद्य जंगली जनवरोंसे भयभीत थे और मदत करने के लिए हिचकिचा रहे थे तब उस शेर ने कहा “चिंता मत करो हम तुम नुकसान नहीं पहुचायेंगे ” | वैद्य ने उसके बात पर यकींन कर लिया और पेड़ को उठा लिया, शेर आज़ाद हो गया और उसकी मदत करने के लिए वैद्य का शुक्रिया अदा किया और कहा “तुम्हे किसी सहायता की आवश्यकता हो तो मुझे कहना मै तुम्हारी मदत करने के लिए जरूर आऊंगा”|वैद्य ने शेर को धन्यवाद् कहा और साप को निकलने लगा जब साप आजाद हुवा तो उसने भी वही कहा “आप ने मेरी जान बचाई है में भी आपका एहसानमंद हु यदि आपको किसी सहायता की जरुरत हो तो मुझे बुलाये मै आपकी मदत करने के लिए जरूर आऊंगा | शेर और साप चले गए और वैद्य घर आ गया |

कुछ दिन बित गए और वैद्य दवा बनाने के लिए जड़ी बूटी लेने के लिए फिर से जंगल जाना पड़ा | अचानक उसने एक आवाज सुनी वो एक तेंदवे की आवाज थी, उनपर एक तेंदवा हमला करेने वाला था | उन्हें किसी की मदत की जरुरत थी और उसे शेर का वादा याद आया और शेर को मदत के लिए पुकारने लगा | शेर ने वैद्य की पुकार सुनी और दौड़ते हुए उसे बचाने के लिए आ गया | उसने तेंदवे को अपने दहाड़ दे डरा कर भगा दिया | शेर ने वैद्य को उसकी गुफा में आने का निमंत्रण दिया और कहा की “मुझे बहुत ख़ुशी हूई की आपने मुझे मदत के लिए बुलाया” |

शेर ने वैद्य को कुछ सोना भी दिया जो उसे जंगल में मिला था | जैसे ही वैद्य शेर की गुफा से निकला उसे सोनार के वादे के बारे में याद आया और वो गांव चले गए | वैद्य सोनार के गांव आयाऔर वो सोना सोनार को दिया और कहा की “एक जंगल के शेर ने मुझे दिया है”. उसने सोनार से कहा की “क्या तुम मुझे सोने के बदले पैसे दे सकते हो” | सोनार ने वह सोना पहचान लिया वो सोना राजा के बेटे का था | राजा का बेटा एक दिन शिकार पर निकला था पर वापस लौटकर नहीं आया था | सोनार को तब राजा की घोषणा याद आयी, “जो भी राजकुमार या राजकुमार के सोने को खोज पायेगा,या वापस ले आएगा उसे इनाम दिया जायेगा”, सोनार के मन में लालच आ गया| सोनार ने वैद्य को इंतजार करने को कहा को की वह सोने का गुण परखना चाहता है | ऐसा कहकर सोनार घर के पीछे से छुपकर निकल कर राजा के पास चला गया |

उसने राजा से कहा की एक आदमी के पास यह सोना था और शायद उसने राजकुमार को मारा होगा | राजा गुस्सा आया और उसने वैद्य को सजा सुनवाई, वैद्य को जेल में बंद कर दिया | जैसे ही वैद्य को जेल में डाला गया वे चिल्लाने लगा”मैंने कोही गुनाह नहीं किया है वो सोना मुझे मेरे दोस्त शेर ने दिया है, सोनार झूट बोल रहा है कृपया मुज़े जेल से बहार निकालो” | जब वैद्य जेल में बंद था उस वक्त वहा एक चूहा उसके पास आया और उससे कहा “मैं तुम्हारी मदत करना चाहता हु” | तब वैद्य को सांप की बात याद आयी और साप को पुकारने लगा |

तब वहा साप आया और उसने साप सब कुछ बताया | तब साप के मन में विचार आया और उसने वैद्य से कहा की वह रानी को डस लेगा उसके बाद आप राजा के सामने उनका उपचार करने का प्रस्ताव रखे | वैद्य को साप की बातो से सहमत हुवा | योजना अनुसार साप रानी के कक्ष में गया और उनके पैर पर डंक मार दिया | जैसे ही यह बात वैद्य को पता चली उसने राजा के सामने रानी के उपचार का प्रस्ताव रखा | राजा ने उसे रानी के उपचार का प्रस्ताव स्वीकार किया और उसे जेल से बाहर निकला | उसने रानी का उपचार किया | राजा वैद्य से बहुत खुश हुवा उसने वैद्य से कहा उन्हे जो चाहिये वो मांगे किन्तु वैद्य ने कहा मुझे कुछ नहीं चाहिए | उस सोनार ने आपसे झूट बोला मुझे वो सोना मेरे शेर दोस्त ने दिया है | कृपया करके आप उस झूठे सोनार को सजा दे | राजा को बहुत गुस्सा आया और उसने वैद्य को छोड़ दिया | किन्तु उस सोनार को बंदी बना लिया

तो हमने क्या सीखा “हमेशा हर एक वादे या इंसान पर भरोसा नहीं करना चाहिए “

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