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Kamchor Gadha | कामचोर गधा | Hindi Kahaniya Web

रामपुर गांव में एक व्यापारी रहता था | उसके पास एक गधा था | व्यापारी गधे पर सामान लेकर एक शहर से दूसरे शहर लेकर जाता था | एक दिन उसने उस गधे पर सक्कर की बोरी रख दी और शहर की तरफ निकल पड़ा | रास्ते में उसे एक नदी मिली नदी में जैसे ही गधा पैर रखता है | उसका पैर फिसल जाता है और वह नदी में गिर जाता है | वह जैसे ही पानी गिरता है सक्कर की बोरी भी पानी में गिरकर घुल जाती है और बोरियो का वजन कम हो जाता है |

व्यापारी बची हुयी बोरिया फिर से गधे के पीठ पर रखता है तो गधे को बोरियो का वजन कम लगने लगता है | गधा सोचता है ‘यह तो कमाल हो गया, पानी में गिरते ही बोरियो का वजन काम हो गया’ | व्यापारी मायूस होकर घर वापस आ जाता है | घर आकर गधे को पेट भरकर खाना खिलता है और गधा ख़ुशी-ख़ुशी सो जाता है | दूसरे दिन फिर व्यापारी सक्कर की बोरिया गधे पर रखता है और शहर की तरफ निकल पड़ता है |

उसे रास्ते में फिर से नदी मिलती है | इस बार गधा जान बूझकर पानी में गिरता है | ऐसे ही गधा जान बूझकर नदी में गिरता है फिर से बोरियो का वजन कम हो जाता है और कामचोरी करने लगता है | गधा मन ही मन सोचता है ‘मेरा मालिक भी कितना बेवखूफ़ है, में आसानी से रोज उसे उल्लू बना देता हु’|

एक दिन व्यापारी को पता चल गया की गधा जान बुजकर पानी में गिरता है और कामचोरी करता है | उसने एक दिन सक्कर की बोरियो के जगह गधे की पीठ पर रुई की बोरिया चुपके से रख दी | गधा ख़ुशी-ख़ुशी बोरिया लेकर निकला | जैसे ही वह नदी के पास पंहुचा रोज की तरह उसने नदी में गिरने का नाटक किया | नदी में गिरते है रुई की बोरिया नदी में गिरकर फूल गयी और उसका वजन दुगना हो गया |

व्यापारी ने बोरिया उठाकर गधे पर रख दि | गधा चौक गया और सोचने लगा ‘अरे ऐसे कैसे बोरियो का वजन दुगना हो गया, पहले तो बोरियो का वजन इतना नहीं था | गधे को बोरिया उठाने में बहुत तकलीफ हुयी और उसे अपने गलती समझ आ गयी |

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की हमारा काम हमें वक्त पर कर लेना चाहिए और हमें अपना काम सच्चे दिल से और ईमानदारी से करना चाहिए | किसी भी काम में कामचोरी नहीं करनी चाहिए |

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