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तोते की कहानी | Tote Ki Kahani In Hindi

बहुत साल पहले की बात है | एक गांव के पास घना जंगल था | उस जंगल में एक बहुत पुराणा पेड़ था | उस पेड़ पर एक तोता घोसला बनाकर अपने बच्चो के साथ रहती थी | एक दिन तोते की माँ अपने बच्चो से कहती है “अब तुम दोनों बड़े हो गए हो, इसलिए अब तुम लोग अपने मर्जी से जहा चाहो घूम सकते हो, लेकिन एक बात हमेशा याद रखना, हम कोही मामूली तोते नहीं है, हमारे शरीर सोने से बने है, और हमारे पास खास जादुई शक्ति है | जिसकी वजह से हमें एक दूसरे का ज्यादा ध्यान रखना होगा, और हम जादुई शक्ति से किसी की भी मदत कर सकते है, और एक बात हमेशा याद रखना तुम किसी घर में लगे पेड़ से फल नहीं खावोगे, अगर तुमने ऐसा किया, तो तुम्हारा शरीर एक साल के लिए कमजोर हो जायेगा” | तब बच्चे कहते है ठीक है माँ “आज से हम आपकी सारी बाते याद रखने की कोशिश करेंगे” |

यह कहकर दोनों बच्चे सुनहरी तोते खुले आसमान में उड़ने लगे | और फिर दोनों बच्चे अपने-अपने पसंद के अनुसार अलग-अलग दिशा में चले गए | बहुत देर तक उड़ने के बाद एक सुनहरी तोते को भुक लगने लगी, और उसको एक घर के पास एक आम का पेड़ नजर आया वह तुरंत आम के पेड़ पर जाकर आम खाने लगा | वह अपनी माँ की बताई बात भूल गया था, की किसी घर में  लगे पेड़ के फल को नहीं खाना है | कुछ समय बाद उस तोते का शरीर धीरे-धीरे कमजोर हो गया |  वह आसमान में उड़ान नहीं भर सकता था और अब वो जंगल नहीं जा सकता था | कोशिश करने के बाद वह ज्यादा देर आसमान में देर तक उड़ने के बाद वो बोहोत थक गया, और एक छोटे से पेड़ पर बैठ गया | 

उस वक्त उसे किसीने देख लिया | और चुपचाप आकर उसे पकड़ लिया | जिसने उसे पकड़ा था वह गुड़िया थी जो उस घर में रहती थी |  गुड़िया ने उस सुनहरे तोते को पिंजरे में बंद करके घर के बालकनी में रख दिया |  गुड़िया रोज तोते को खाना देती थी | मगर सुनहेरि तोता अपना परिवार से बिछड़ने पर बहुत ही उदास था | कुछ दिनों तक सुनहरी तोता बंद रहा |  और फिर एक दिन वो  बहोत कोशिशों के बाद जैसे तैसे करके पिंजरे से बाहर उड़ गया |  फिर गुड़िया अपने तोते को ढूंढते-ढूंढते गांव के पास एक नदी पर गयी | और जब उसे तोता नहीं मिला, तो वो नदी के किनारे पर बैठकर जोर-जोर से रोने लगी | 

तभी वह पर चाचा गोपाल अपने काम से लौट के घर की तरफ जा रह था | और उसका ध्यान उस गुडिया तरफ जाता है | उसके पास जाकर मन में बोलता है की “अरे ये तो अपनी रघुराम की गुड़िया बेटी है, और वो यहाँ बैठकर क्यू रो रही है? में अभी जाकर पूछता हु | यह सोचकर चाचा गोपाल गुड़िया के तरफ जल्दी-जल्दी जाने लगा और उस गुड़िया के पास जाकर पूछा |

गोपाल चाचा:  ” क्या हुआ गुड़िया बेटी?  तुम यहाँ अकेले बैठकर क्यों रो रही हो? बतावो मुझे”

गुड़िया: गोपाल चाचा तुम इस पिंजरे को अच्छे से देखो आपको समझ मे आएगा, की में यहाँ क्यू अकेले बैठकर रो रही हु

गोपाल चाचा: ओह।… ! तो तुम्हारी तोता उड़ गया है, ये अच्छी बात है | अब वो अपने परिवार के साथ खुश रहेगा |

गुड़िया: नहीं-नहीं वो मेरे पास बहोत खुश था | मे उसका बहोत ख्याल रखती थी | उसे समय पर खाना भी देती थी |  में उसे घर वापस ले जाने आयी हु | देखना इसलिए तो उसे ढूंढते-ढूंढते यहाँ तक आयी हु  |

गोपाल चाचा:  पिंजरे में बंद करके, सही समय पपर खाना देने से और ख्याल रखने से वो खुश नहीं होता है | बल्कि उसे खुले आसमान में उड़ने देना चाहिए | इसलिए वो मौका देखते ही उड़ गया है |

गुड़िया: नहीं गोपाल चाचा ऐसा नहीं है | वो सुनहरी तोता तो मेरा बहोत अच्छा दोस्त था | 

गोपाल चाचा: वो तुम्हारा अच्छा दोस्त था | मगर तुम उसको अपना अच्छा दोस्त नहीं बान पायी, पिंजरे में वो आजाद नहीं था | खुला आसमान, पेड़, जंगल, उसका असली दोस्त है | वहा पर वो खुश रहेगा | एक बार सोचो वो अपने परिवार से अलग रहने से उसको कितना दुःख हुआ होगा | और उसका परिवार अलग से उस तोते के लिए परेशान होगा | मेरी बात सुनो अब तुम घर लौट जावो | 

गुड़िया: नहीं-नहीं, में अब घर नहीं लौटूंगी, में आपकी कोई भी बात नहीं सुनूंगी | आज में अपने सुनहरे तोते को लिए बिना घर नहीं लौटूंगी | यही दिन भर बैठी   रहूंगी | आप जावो यहाँ से |

गोपाल चाचा: “ये लड़की बहोत जिद्दी है | ऐसे नहीं मानेगी | में जाकर पास में कोही छोटा सा तोता देखता हु | यह सोचकर गोपाल चाचा उस सुनहरे तोते को पकड़ने के लिए जा रह था | बस कुछ ही देर ढूंढने के बाद अचानक उसने छोटे से सुनहरी तोते को देखा | और सोचा, अरे वो सुनहरी तोता तो यह पर बैठा है | में अभी जाकर उसे पकड़कर गुड़िया को देता हु |

शरीर कमजोर होने के वजह से सुनहरा तोता ज्यादा दूर तक नहीं जा पाया | वो इस जंगाल में छोटी से पेड़ पर दुःखी होकर बैठा था | तभी गोपाल चाचा वहा दबे पाव ख़ामोशी से जाकर उस सुनहरे तोते को पकड़ने लगा | तो सुनहरा तोता वहा से तुरंत उड़ गया | गोपाल चाचा भी उसे पकड़ने केलिए उसके पीछे जाने लगा | और फिर सुनहरी तोता को पकड़ने के बाद  जल्दी से गुड़िया के पास ले गया | और वो गुड़िया से बोला  “यह लो तुम्हारा सुनहरा तोता” |

गुड़िया: आप बहोत अच्छे हो चाचा |

गुड़िया सुनहरा तोता लेकर ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर लेकर आयी |  एक बार फिर से सुनहरी तोते को पिंजरे में ड़ालकर बालकनी में रख दिया |  दुबारा से पिंजरे, में बंद होकर बच्चा सुनहरी तोता बहोत मायूस  हो गया | वह इधर उधर देखने लगा |  तब उसने देखा की बालकनी  के पास एक बड़ा पेड़ है | उस पेड़ पर कही  तरह के चिड़िया अपने-अपने घोसले बनाकर अपनी परिवारों के साथ ख़ुशी से रहते है |  वो सब चिड़िया आजाद थे |  जो मर्जी कर सकते थे |  यहाँ वहा से ढूंढकर खाना खा सकते थे |  चिड़िया अपने दोस्तों के साथ मिल जुलकर खेलते थे | मजे करते थे |  यहाँ वह एक साथ उड़ते थे |  फिर वापस एक साथ घर लौट आते थे | और मीठी मधुरआवाज में गाना भी गाते थे |

यह सब देखकर पिंजरे में बंद हुआ छोटे सा सुनहरा तोता को बहुत दुःख होता है |  उसे भी यहाँ वह घूमने का, अपने दोस्तों के साथ खेलने का बहुत मन होता है | लेकिन वो अपनी मन की बाते गुड़िया को नहीं समजा सकता था | इस तरह कुछ महीने बित गए | फिर अचानक एक दिन आसमान पर काले बदल छा गए | बिजली चमकने लगी | फिर बहोत जोर से बरसात गिरी | यह बारिश सुनहरे तोते की पहली बारिश थी | इसिलए उसका बारिश में भीगने का मन हो रहा था | और यहाँ गुड़िया कुछ दिनों से बीमार थी |

डॉक्टर ने उसे आराम करने के लिए कहा था | इसलिए गुड़िया कुछ दिनों से स्कूल नहीं जा पायी थी | और अपने दोस्तों के साथ भी नहीं खेल पायी थी | उसी कारन वह बहोत दुःखी थी | और इतने दिनों से घर में बंद होकर थक गयी थी | अब घर में उसका बिलकुल भी मन नहीं लग रह था | वो स्कूल जाना चाहती थी |  अपने बिलकुल पहले की तरह, दोस्तों के साथ खेलना चाहती थी | तब अचानक वो तोता चिल्लाया | तब गुड़िया चौक गयी | और सोचा “कुछ दिन घर में बंद होकर मुझे कितना दुःख हो रहा है और मैने तोता एक साल तक अपने परिवार से दूर रखकर, पिंजरे में बंद कर दिया है | वह बहुत दुःखी होगा | उस दिन मुझे गोपाल चाचा ने ठीक कहा था |

अगले दिन सुबह होते ही गुड़िया अपने घर के पास खुले मैदान में अपना सुनहरी तोता लेकर गयी, और पिंजरे का दरवाजा खोल दिया | तभी वो सुनहरी तोता तुरंत पिंजरे से बहार निकलकर गुड़िया के पास गया |और गुड़िया के ऊपर अपना जादुई शक्ति का प्रयोग किया तभी गुड़िया के शरीर में अचानक से चमत्कार होने लगा |और वो बिलकुल ठीक हो गयी | तोता अब जंगल तरफ उड़ने लगा |

गुड़िया कहती है “आसमान में उड़ता हुआ मेरा सुनहरा तोता आज कितना अच्छा लग रहा है | उसे इतना ज्यादा ख़ुश मैंने पहले कभी नहीं देखा | मेरे तोता को अपने हाथो से आजाद करके में भी बहुत खुश हु |आज के बाद में कभी भी किसी और पंछी को पिंजरे में बंद नहीं करुँगी | और कल ही स्कूल जाकर मेरी सब दोस्तों को चिड़िया को पिंजरे में बंद न करने के लिए समझाऊंगी | यह कहकर गुड़िया इस खाली पिंजरे के पास खड़ी रही | और उस सुनहरी तोते को जंगल में  जाता हुआ देख रही थी |

सिख: बच्चो हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है “किसी आजाद उड़ने वाले पंछियो को कभी भी पिंजरे में बंद नहीं करना चाहिए, उन्हें दुःखी करके हम खुश नहीं रह सकते है |  

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